Bangladesh Politics Shock: Sheikh Hasina को Death Sentence, Rise to Fall की कहानी

बांग्लादेश की राजनीति में Sheikh Hasina पिछले दो दशक से केंद्र में रही हैं। समर्थकों के अनुसार वह modern, development-oriented Bangladesh की निर्माता हैं। वहीं आलोचक उन्हें सत्ता की भूख में dictatorial tendencies वाली नेता मानते हैं।

हाल ही में International Crimes Tribunal (ICT), Bangladesh ने हसीना को crimes against humanity के आरोप में दोषी ठहराते हुए death sentence सुनाई। यह सुनवाई हसीना की गैर-मौजूदगी में हुई, लेकिन इसे उनके Political Life का सबसे नाटकीय मोड़ माना जा रहा है।

उदय से पतन तक: Sheikh Hasina की कहानी

शेख हसीना का जन्म 28 सितंबर 1947 को East Pakistan (अब Bangladesh) के Tungi Para में हुआ। उनके पिता Sheikh Mujibur Rahman ने भारत की मदद से 1971 में East Pakistan को स्वतंत्र कराया और Bangladesh का पहला राष्ट्रपति बने।

हसीना ने Dhaka University से Bengali Literature में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और छात्र राजनीति में सक्रिय हुईं। 1968 में उन्होंने परमाणु वैज्ञानिक M.A. Wazed Miah से विवाह किया। उनके दो बच्चे हैं: बेटा Sajeeb Wazed Joy और बेटी Saima Wazed Putul।

सियासी उथल-पुथल और परिवार पर हमला

अगस्त 1975 में हुए Military Coup में हसीना के परिवार के कई सदस्यों की हत्या कर दी गई। हसीना और उनकी बहन Rehana केवल इसलिए बच गईं क्योंकि वे विदेश में थीं। तत्कालीन Indian Government ने उन्हें शरण दी।

1981 में हसीना वापस Bangladesh लौटीं और Awami League की महासचिव बनीं। उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी थीं Khaleda Zia, जिनके साथ उनका Political Rivalry ‘Battle of Begums’ के रूप में सुर्खियों में रही।

प्रधानमंत्री बनने का लंबा दौर

शेख हसीना पहली बार 1996 में Prime Minister of Bangladesh बनीं। 2001 में सत्ता से बाहर हुईं, लेकिन 2008 में भारी बहुमत से वापसी की।

उनके नेतृत्व में Awami League ने 2014 और 2018 के आम चुनावों में भी जीत हासिल की। उनके कार्यकाल में Bangladesh ने rapid economic growth, Padma Bridge जैसी infrastructure projects और global textile industry में सफलता देखी।

विरोध और इस्तीफा

हसीना पर opposition voices को दबाने, मीडिया पर अंकुश लगाने और government agencies को अतिरिक्त power देने के आरोप लगे। 2024 में student protests के दौरान हिंसा भड़क उठी, जिससे हसीना को Prime Minister पद से इस्तीफा देना पड़ा और भारत भागना पड़ा।

मानवता के खिलाफ अपराध का मुकदमा

हसीना के इस्तीफे के बाद Muhammad Yunus की interim government ने ICT को पुनर्गठित किया। 2024 के protests के दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गए। ICT ने महीनों की सुनवाई के बाद हसीना को death penalty दी।

वर्तमान में हसीना भारत में रहते हुए अपने Political legacy और Bangladesh की political turmoil को दूर से देख रही हैं।