Asset Declaration Controversy: चुनावी साल में उत्तराखंड सरकार के फैसले पर क्यों भड़की कांग्रेस?

Uttarakhand Politics में एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के Personnel Department Uttarakhand द्वारा सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से property details / asset declaration मांगे जाने को लेकर मुख्य विपक्षी दल Congress ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि Assembly Election 2027 से पहले कर्मचारियों को डराने और दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है।

क्यों मांगा गया कर्मचारियों से संपत्ति का ब्यौरा?

दरअसल, Employee Service Rules के तहत उत्तराखंड में कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों को हर वर्ष अपनी movable and immovable property details कार्मिक विभाग को देनी होती हैं। हाल ही में कार्मिक विभाग की ओर से सभी कर्मचारियों को एक reminder letter जारी किया गया, जिसमें लंबित संपत्ति विवरण जल्द जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार इसे routine administrative process बता रही है, जबकि विपक्ष इसे employee harassment और राजनीतिक दबाव का तरीका बता रहा है।

 

Ganesh Godiyal का बड़ा आरोप: चुनाव से पहले कर्मचारियों पर ‘नकेल’

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Ganesh Godiyal ने इस मुद्दे पर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कर्मचारियों को संपत्ति का डर दिखाकर यह संकेत देने की कोशिश की जा रही है कि अगर उन्होंने सत्ता पक्ष का समर्थन नहीं किया, तो परिणाम भुगतने होंगे।

गोदियाल के अनुसार,
सरकार कर्मचारियों से तो asset disclosure की बात कर रही है, लेकिन कई ऐसे मंत्री हैं जिन पर disproportionate assets के आरोप हैं। सवाल यह है कि उनकी संपत्ति को लेकर सरकार चुप क्यों है और उन्हें मंत्रिमंडल में क्यों बनाए रखा गया है।

पहले मंत्रियों और विधायकों की संपत्ति सार्वजनिक हो: कांग्रेस

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया political pressure strategy का हिस्सा है। कर्मचारियों को या तो चुप रहने या फिर सरकार के पक्ष में खड़े होने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनका कहना है कि अगर पारदर्शिता की बात है, तो पहले ministers and MLAs asset details सार्वजनिक की जानी चाहिए, उसके बाद इसे सभी पर समान रूप से लागू किया जाए।

BJP का जवाब: यह सामान्य और पहले से चली आ रही प्रक्रिया

वहीं, सत्ता पक्ष BJP Uttarakhand ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता और विधायक Vinod Chamoli ने कहा कि कर्मचारियों से हर साल संपत्ति का विवरण लेना कोई नई बात नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था पहले से लागू है और जब कर्मचारी समय पर जानकारी नहीं देते, तो विभाग की ओर से official reminder जारी किया जाता है। इसमें राजनीति ढूंढना पूरी तरह गलत है, क्योंकि जानकारी लेने और देने वाले दोनों ही सरकारी कर्मचारी हैं।

चुनाव से पहले बढ़ता राजनीतिक तापमान

Uttarakhand Assembly Election 2027 नजदीक आते ही कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बनते नजर आ रहे हैं। संपत्ति विवरण का यह मामला आने वाले समय में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव को और तेज कर सकता है।