हर्षिल में खतरे की घंटी: बढ़ती झील, घर छोड़ने को तैयार नहीं लोग

उत्तराखंड के हर्षिल में एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है। यहां बने कृत्रिम झील का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे धराली जैसी आपदा की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित जगहों की ओर जाने की चेतावनी दी है, लेकिन कई लोग घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं। इस बीच रोजमर्रा की जरूरत की चीज़ों का संकट भी बढ़ गया है।

राशन और गैस की भारी किल्लत

हर्षिल में राशन और गैस सिलेंडर की कमी खतरनाक रूप ले चुकी है। सड़क मार्ग बाधित होने के कारण सप्लाई प्रभावित हो रही है। खराब मौसम के कारण हैली सर्विस पर भी असर पड़ा है। लोग आखिरी एक या आधा सिलेंडर इस्तेमाल कर रहे हैं और कई होटल संचालक अपने होटलों और होम स्टे को बंद करके पहाड़ों से नीचे आ गए हैं।

घर छोड़ने को तैयार नहीं लोग

हर्षिल में सब्ज़ी और राशन सीमित मात्रा में उपलब्ध हो रहा है, जिससे खाने-पीने की दिक्कत बढ़ गई है। इसके बावजूद कुछ लोग अपने घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि “यहाँ हमारा सबकुछ है, नीचे कुछ भी नहीं है, इसलिए हम अपने घरों को नहीं छोड़ेंगे।”

प्रशासन की तैयारी और सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए लोग

जानकारी के मुताबिक अब तक लगभग 1400 लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए हर्षिल से नीचे उत्तरकाशी के धरासू क्षेत्र में पहुंचाया गया है। प्रशासन की पूरी कोशिश है कि झील के बढ़ने से पहले हर्षिल को खाली करा लिया जाए, ताकि किसी भी अप्रत्याशित आपदा से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

धराली हादसे की याद

बता दें कि 5 अगस्त को धराली में बादल फटने और भूस्खलन से विनाशकारी आपदा आई थी। भारी बारिश और पहाड़ के बड़े हिस्से के टूटने से खीर गंगा नदी में उफान आया, जिसने धराली बाजार, होटलों, घरों और दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। कई इमारतें पूरी तरह से नष्ट हो गईं या मलबे में दब गईं। भूस्खलन और मलबे के कारण गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग कई जगहों पर बह गया, जिससे धराली और हर्षिल घाटी का बाकी दुनिया से संपर्क कट गया।

इस आपदा ने प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में काम किया है। हर्षिल में बनी झील का बढ़ता जलस्तर इस खतरे को और बढ़ा रहा है।