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After Pahalgam Attack, Hindus in Pakistan were made to raise anti-India slogans, know the truth
Pahalgam Terror Attack के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। न केवल Indus Water Treaty (सिंधु जल संधि) को रोक दिया गया है, बल्कि भारत में रह रहे सभी पाकिस्तानियों को देश छोड़ने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त कई पाकिस्तानी Diplomats को वापस भेज दिया गया है।
इन कड़े कदमों से बौखलाया Pakistan अब अपनी घरेलू राजनीति में Hindu Minority का इस्तेमाल कर रहा है। पाकिस्तान के Balochistan Province की राजधानी Quetta में हिंदू समुदाय के कुछ सदस्यों से Anti-India Protests करवाए गए। यह प्रदर्शन Pakistan People’s Party (PPP) के नेता और बलूचिस्तान विधानसभा के सदस्य Sanjay Kumar के नेतृत्व में हुआ।
प्रदर्शन में लोगों को Anti-Modi और Anti-India slogans लिखी हुई तख्तियां पकड़ा कर सड़कों पर उतारा गया। यह रैली Quetta Press Club तक निकाली गई। प्रदर्शन का मकसद यह दिखाना था कि Pahalgam Attack में भारत का हाथ नहीं है, और पाकिस्तान की जनता (यहाँ तक कि Hindu Community भी) भारत के खिलाफ एकजुट है।
हालाँकि, सच्चाई यह है कि पाकिस्तान की करीब 25 करोड़ की आबादी में अब Hindu Population केवल 1 करोड़ से भी कम रह गई है। इनकी बड़ी संख्या Sindh और Balochistan में रहती है, और ज़्यादातर गरीबी में जीवन गुजार रही है। सरकारी नौकरियों, सेना और संवैधानिक संस्थानों में इनका प्रतिनिधित्व न के बराबर है।
Pakistan की इस रणनीति को Propaganda War का हिस्सा माना जा रहा है। अपने देश के गरीब और अल्पसंख्यक हिंदुओं को India के खिलाफ इस्तेमाल करना इस बात का सबूत है कि वह किस स्तर तक जाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि बचाना चाहता है।
Sanjay Kumar ने रैली में दावा किया कि अगर भारत ने पाकिस्तान पर हमला किया, तो यहां का हर हिंदू देश की सेना के साथ खड़ा होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को Indus Water Treaty को इस तरह से एकतरफा नहीं रोकना चाहिए था।
गौरतलब है कि 1947 Partition के समय पाकिस्तान में हिंदू जनसंख्या 10% से अधिक थी, जो अब घटकर 3% से भी कम रह गई है। धीरे-धीरे ये समुदाय किनारे कर दिए गए और अब राजनीतिक हथियार बना दिए गए हैं।
पाकिस्तान की एक English news website (जैसे Dawn) ने इस विरोध प्रदर्शन की एक तस्वीर प्रकाशित की है, जिसमें कहा गया है कि यह प्रदर्शन हिंदू समुदाय ने किया है, जबकि तस्वीरों में ज़्यादातर लोग मुस्लिम नजर आते हैं और हिंदू समुदाय की उपस्थिति बेहद कम है।