KGMU Conversion Case: जांच समिति में बड़ा बदलाव, Hindu groups के दबाव में एक्शन

KGMU Conversion Case Update में बड़ा प्रशासनिक कदम सामने आया है। केजीएमयू की महिला रेजिडेंट डॉक्टर से दुष्कर्म और कथित religious conversion attempt के मामले में हिंदू संगठनों के दबाव के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच समिति में बदलाव कर दिया है। अब यह मामला पांच नहीं बल्कि सात सदस्यीय inquiry committee द्वारा जांचा जाएगा।

केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने जानकारी दी कि संशोधित समिति में महिला डॉक्टर के प्रतिनिधित्व के साथ-साथ एक retired police officer को भी शामिल किया गया है, ताकि जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष हो सके।

Hindu Organisations का प्रदर्शन, फिर हुई वार्ता

इससे पहले Vishwa Hindu Parishad (VHP) के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को केजीएमयू के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। दोपहर में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मुख्य गेट पर पहुंचे और नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति को देखते हुए केजीएमयू प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को dialogue meeting के लिए आमंत्रित किया।

सर्जरी विभाग के सभागार में हुई बातचीत के बाद प्रशासन ने हिंदू संगठनों की मांग के अनुरूप जांच समिति का विस्तार किया। इसमें Queen Mary Hospital की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल और पूर्व DGP व पूर्व सूचना आयोग अध्यक्ष भावेश सिंह को शामिल किया गया।

आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर निलंबित

प्रवक्ता ने बताया कि पैथोलॉजी विभाग के आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर रमीज मलिक को तत्काल प्रभाव से suspended कर दिया गया है। साथ ही केजीएमयू परिसर और हॉस्टल में उनके प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। मामले में FIR registered हो चुकी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस आधार के STF या ATS को पत्र नहीं भेजा जा सकता।

‘Blacklisting की मांग’

विश्व हिंदू परिषद के जिला संगठन मंत्री समरेंद्र प्रताप ने कहा कि इस प्रकरण से केजीएमयू की छवि को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने मांग की कि आरोपी डॉक्टर को blacklist किया जाए। साथ ही उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि विश्वविद्यालय में कुछ कर्मचारियों को retirement के बाद भी नियुक्त किया गया है, जिन पर गंभीर आरोप हैं। परिषद ने ऐसे मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

इस विषय में कई विधायकों द्वारा शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। हाल ही में विधायक सीताराम वर्मा की शिकायत पर शासन ने संज्ञान लिया है। इसके बाद अनु सचिव ज्ञानेंद्र शुक्ला ने कुलसचिव को पत्र भेजकर सेवानिवृत्ति के बाद नियुक्त कर्मचारियों की जानकारी मांगी है।

‘Special Community’ तैनाती के आरोप खारिज

डॉ. केके सिंह ने स्पष्ट किया कि आउटसोर्सिंग में किसी special community को प्राथमिकता देने के आरोप factually incorrect हैं। जांच में सामने आया कि विश्वविद्यालय में तैनात कुल 3,995 outsourcing employees में से केवल 289 अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। पैथोलॉजी विभाग के 51 कर्मियों में सिर्फ दो और POCT के 174 कर्मचारियों में केवल 25 अल्पसंख्यक हैं।

Conversion Information के लिए Email जारी

केजीएमयू प्रशासन ने religious conversion related information जुटाने के लिए एक आधिकारिक ईमेल आईडी
factfindingcommittee@kgmcindia.edu

जारी की है। प्रवक्ता ने कहा कि केजीएमयू के डॉक्टर, कर्मचारी या समाज के जागरूक नागरिक यदि धर्मांतरण से जुड़ी किसी भी जानकारी, घटना या सबूत रखते हैं, तो वे इस ईमेल पर भेज सकते हैं।