Foreign daughters-in-law in this state have increased the Election Commission's tension, and the SIR process poses many challenges.
उत्तराखंड में Special Intensive Revision (SIR) लागू होने से पहले ही चुनाव आयोग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। राज्य में भारी पलायन, खाली गांव और विदेश या दूसरे राज्यों में शिफ्ट हुए लोगों के कारण मतदाता सूची अपडेट करने में मुश्किल बढ़ सकती है। खासतौर पर प्री-SIR चरण में BLO (Booth Level Officer) को हर मतदाता तक पहुंचना होगा, लेकिन खाली गांवों और दूर बसे निवासियों तक पहुंच बनाना आसान नहीं होगा।
पहाड़ों का पलायन बना सबसे बड़ी चुनौती
उत्तराखंड में हजारों गांव आज भी खाली पड़े हैं, जहां लोगों का नाम तो वोटर लिस्ट में है, लेकिन वे अब राज्य के बाहर या विदेश में रह रहे हैं। ऐसे में उनकी पहचान और सत्यापन करना काफी जटिल होगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के अनुसार:
“उत्तराखंड से सबसे ज़्यादा पलायन दिल्ली और यूपी में हुआ है। वहां अभी SIR प्रक्रिया जारी है, और उनकी फाइनल सूची आने के बाद ही उत्तराखंड में सत्यापन आसान होगा।”
पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में अलग-अलग तस्वीर
जहां मतदाता बढ़े हैं:
इन सीटों पर 10 साल में 72% तक नए वोटर बढ़े हैं:
धर्मपुर (सबसे अधिक वृद्धि)
डोईवाला
ऋषिकेश
सहसपुर
काशीपुर
रुद्रपुर
रायपुर
किच्छा
कालाढूंगी
भेल रानीपुर
अब इन सीटों पर नए वोटरों की तुलना 2003 की मतदाता सूची से की जाएगी।
जहां मतदाता घटे हैं:
पलायन के चलते इन क्षेत्रों की मतदाता संख्या कम हुई है:
सल्ट
रानीखेत
पौड़ी
लैंसडौन
चौबट्टाखाल
देवप्रयाग
केदारनाथ
घनसाली
यहां यह देखना होगा कि जो लोग बाहर नौकरी कर रहे हैं, वे अपने नाम वोटर लिस्ट में सहेजते हैं या नहीं।
Married Women Verification: सबसे पेचीदा सेक्शन
SIR में शादीशुदा महिलाओं को खुद को वोटर सूची में प्रमाणित करने के लिए अतिरिक्त प्रक्रिया से गुजरना होगा:
स्थिति कैसे होगा सत्यापन
अगर 2003 में मायके में नाम था उस रिकॉर्ड को ससुराल क्षेत्र के BLO को देना होगा
2003 में मायके व ससुराल दोनों में नाम नहीं माता-पिता, दादा-दादी या रिश्तेदारी संबंध से पहचान साबित करनी होगी
देशी बहुएं भी Election System पर बोझ
सबसे चुनौतीपूर्ण स्थिति उन महिलाओं की है जिनका मायका नेपाल या अन्य देश में है। ऐसे मामलों में यह सवाल उठ रहा है:
क्या यह नागरिकता का मामला है या सिर्फ वोटर सूची में सत्यापन?
सीईओ पुरुषोत्तम के अनुसार:
“यह नागरिकता का नहीं बल्कि Voter List Verification का मामला है। नियम वही होंगे जो Election Commission of India की गाइडलाइन में हैं।”
Voter Identity Verification अब सिर्फ औपचारिकता नहीं — चुनावी वजूद का सवाल
SIR का असर 2027 विधानसभा चुनावों और आगे होने वाले लोकसभा चुनावों पर भी पड़ेगा।
यह प्रक्रिया तय करेगी कि: