2003 की List नहीं, अब शादी के बाद Citizenship प्रूफ ही मुश्किल

SIR in UP Update: उत्तर प्रदेश में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) के दौरान उन महिलाओं के लिए बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है, जो वर्ष 2003 के बाद नेपाल या अन्य देशों से शादी करके भारत आईं। चूंकि वर्ष 2003 की मतदाता सूची में उनका नाम मौजूद नहीं है, इसलिए उन्हें अपने माता-पिता की nationality, voter ID और पता संबंधी जानकारी देनी पड़ रही है। ऐसी महिलाएं यह जानकारी उपलब्ध नहीं करा पा रही हैं, क्योंकि उनके माता-पिता नेपाल या किसी अन्य विदेशी देश के नागरिक हैं।

Border Districts सबसे ज्यादा प्रभावित

भारत-नेपाल सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के जिलों में सदियों से Roti-Beti संबंध रहे हैं। नेपाल की लड़कियों से शादी होना यहां आम बात है।

इन जिलों में यह समस्या सबसे अधिक सामने आई है:

पीलीभीत

लखीमपुर खीरी

बहराइच

श्रावस्ती

बलरामपुर

सिद्धार्थनगर

महाराजगंज

गोरखपुर

कुशीनगर

देवरिया

स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार इन जिलों में नेपाल की बेटियों की संख्या लाखों में है।

Ground Reality क्या है?

सिद्धार्थनगर, पीलीभीत, महराजगंज जैसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों ने बताया कि BLO (Booth Level Officer) से संपर्क करने पर उन्हें केवल यह जवाब मिला कि
“Form में जो कॉलम हैं, वही भर दें।”

लेकिन समस्या यह है कि फॉर्म में:

माता-पिता का voter ID

old address

proof of residence in 2003

जैसी जानकारी जरूरी है, जो इन महिलाओं के पास उपलब्ध नहीं है।

People’s Voices

सिद्धार्थनगर के प्रदीप ने बताया कि उनकी पत्नी किरण नेपाल की हैं और अब उन्हें मतदान सूची में नाम जुड़वाने के लिए लगातार जिला निर्वाचन कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

पीलीभीत के कमल कुमार की शादी 2018 में नेपाल निवासी प्रतिभा से हुई थी। वह कहते हैं कि अब SIR प्रक्रिया के कारण उन्हें फिर से documentation देना पड़ रहा है, जो practically impossible है।

Problem सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं

यह परेशानी सिर्फ नेपाल से आई महिलाओं तक सीमित नहीं है।
जिन महिलाओं की शादी:

भूटान

बांग्लादेश

श्रीलंका

या अन्य देशों से हुई है

वे भी इसी समस्या से जूझ रही हैं, क्योंकि उनके मायके की voter identity भारत में मौजूद नहीं है।

Election Commission का क्या कहना है?

UP CEO Navdeep Rinwa ने कहा:

“अभी जितनी जानकारी उपलब्ध है, उतना फॉर्म में भर दिया जाए। बाद में निर्धारित दस्तावेजों में से किसी एक को जमा करने का विकल्प दिया जाएगा।”

लेकिन अभी भी clarity की कमी के कारण हजारों महिलाएं document proof के बिना परेशान हैं।

Possible Solution क्या है?

Election experts का मानना है कि ऐसे मामलों के लिए:

Alternate Identity Proof

Marriage Certificate Verification

Residential Proof after Marriage

जैसी प्रक्रिया लागू करनी चाहिए, ताकि genuine applicants voter list से बाहर न रहें।