Land for Job Scam Case: Big setback for Lalu Yadav's family as charges are framed by the court.
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के शुरुआती रुझानों में NDA (BJP–JD(U)) मजबूती से आगे है, जबकि RJD-कांग्रेस-वामपंथी महागठबंधन पिछड़ता दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसमें RJD की पारिवारिक राजनीति और लालू परिवार की अंदरूनी खींचतान का बड़ा हाथ है।
सबसे बड़ा सवाल—आखिर लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटे तेजस्वी और तेजप्रताप की राहें अलग क्यों हुईं?
कौन-सी घटनाएं इस फूट की वजह बनीं? आइए क्रम से समझते हैं।
1. 2017 – लालू की जेल, कमान तेजस्वी को, और यहीं से शुरू हुआ टकराव
2017 में चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव जेल गए।
परिवार और पार्टी की कमान तेजस्वी यादव को सौंप दी गई, जो उस समय सिर्फ 28 साल के थे।
तेजस्वी उपमुख्यमंत्री रह चुके थे और विधानसभा में आक्रामक विपक्ष की भूमिका निभाकर तेजी से लोकप्रिय हुए।
दूसरी ओर तेजप्रताप बड़े बेटे होने के बावजूद धीरे-धीरे हाशिये पर चले गए।
उनकी छवि विवादों से घिरी रही—शादी का विवाद, बयानों को लेकर आलोचना, पार्टी मीटिंग में नाटक आदि।
लालू का संकेत साफ था—वारिस तेजस्वी होंगे।
यही फैसला भाइयों के बीच पहली बड़ी दरार का कारण बना।
2. 2018–19: तेजप्रताप की शादी और तलाक का बवाल, परिवार में बढ़ी दूरी
तेजप्रताप की शादी ऐश्वर्या राय से हुई, लेकिन छह महीने में ही रिश्ता टूट गया। इसके बाद:
तेजप्रताप ने ऐश्वर्या पर गंभीर आरोप लगाए।
राबड़ी देवी और तेजस्वी ने चुप्पी साधे रखी।
तेजप्रताप ने इसे “परिवार द्वारा दरकिनार” किए जाने के रूप में देखा।
यहीं से तेजप्रताप की नाराज़गी व्यक्तिगत और गहरी हो गई।
उन्होंने अलग पार्टी बनाने की धमकी दी और महीनों तक RJD से दूरी बनाए रखी।
3. 2020 विधानसभा चुनाव: टिकट और रोल को लेकर नई तकरार
2020 के चुनाव में:
RJD ने तेजस्वी को सीएम फेस बनाया—उनकी रैलियां सुर्खियों में रहीं।
तेजप्रताप को सिर्फ महुआ सीट मिली, जिस पर वे नाराज थे।
वे चाहते थे:
पटना की कोई बड़ी सीट
या
चुनाव प्रचार में बड़ा रोल
हार के बाद तेजप्रताप ने खुलेआम कहा कि पार्टी में उनके साथ “सौतेला व्यवहार” होता है।
4. 2022: तेजप्रताप बनाम तेजस्वी—RJD के भीतर खुला संघर्ष
2022 में मतभेद चरम पर पहुंच गया।
तेजप्रताप ने तेजस्वी के करीबी नेताओं पर हमला बोला।
सोशल मीडिया पर बार-बार तेजस्वी के फैसलों की आलोचना की।
मीसा भारती को राज्यसभा भेजे जाने पर परिवारवाद का आरोप लगाया।
तेजप्रताप ने अपनी अलग “छात्र RJD” तक बना ली—जो तेजस्वी की युवा ब्रिगेड के खिलाफ एक स्पष्ट चुनौती थी।
5. 2024–25: RJD की लगातार हार, रणनीति में फर्क और सार्वजनिक दूरी
2024 लोकसभा चुनाव में RJD को सिर्फ 4 सीटें मिलीं।
तेजस्वी पूरी ताकत से चुनाव लड़ते रहे, लेकिन तेजप्रताप लगभग निष्क्रिय रहे।
तेजप्रताप का आरोप:
पार्टी में “चमचे” हावी हैं
असली लालू समर्थक उपेक्षित हैं
2025 विधानसभा चुनाव में दोनों की चुनावी लाइन भी अलग हो गई:
तेजस्वी की लाइन तेजप्रताप की लाइन
EBC + सवर्ण आउटरीच मुस्लिम-यादव (MY) पारंपरिक राजनीति
आधुनिक चुनाव प्रबंधन “लालू की पुरानी राजनीति”
सम्मान यात्रा, युवा कार्यक्रम अलग रैली, अलग संदेश
तेजप्रताप तेजस्वी की रैलियों से गायब रहे और अपनी अलग “लालू विचारधारा” पेश करने लगे।
6. चुनावी नुकसान: RJD की टूटती छवि, कमजोर नेतृत्व
भाइयों के बीच फूट ने RJD को तीन बड़े नुकसान दिए:
1. नेतृत्व को लेकर भ्रम
दोनों की अलग-अलग लाइन से कार्यकर्ताओं में असमंजस फैला।
2. कैडर की एकता टूटी
तेजस्वी समर्थक युवा बनाम तेजप्रताप समर्थक पुराने कार्यकर्ता—दो धड़े बनी।
3. बीजेपी–जेडीयू को मौका मिला
NDA ने RJD की पारिवारिक कलह को चुनावी मुद्दा बनाकर प्रचार में भुनाया।
आज जब परिणाम के शुरुआती रुझान NDA के पक्ष में दिख रहे हैं, तो राजनीतिक माहौल में यह चर्चा तेज है कि:
“लालू परिवार की अंदरूनी फूट ने RJD का खेल खराब कर दिया।”