क्यों बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार कभी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ते? जानिए पूरी वजह

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जिन्होंने राज्य पर सबसे लंबा शासन करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है, एक दिलचस्प राजनीतिक परंपरा का पालन करते हैं—वे विधानसभा चुनाव नहीं लड़ते। नीतीश पिछले कई दशकों से विधानसभा की सीधी लड़ाई से दूर रहे हैं और लगातार विधान परिषद (MLC) के रास्ते से ही सदन में प्रवेश करते रहे हैं।

आखिरी बार कब लड़े थे सीधा चुनाव?

नीतीश कुमार आखिरी बार 1985 में बिहार विधानसभा के सदस्य बने थे।

1995 में हरनौत विधानसभा सीट से एक बार चुनाव लड़ा, लेकिन सीट बरकरार नहीं रख पाए।

उसके बाद उन्होंने पूरी तरह राष्ट्रीय राजनीति पर ध्यान केंद्रित किया और 1989 से 2004 तक छह बार लोकसभा चुनाव जीते।

2004 का चुनाव वह आखिरी बार था जब नीतीश ने व्यक्तिगत रूप से कोई चुनाव लड़ा।

2005 में बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद से वह अब तक कभी विधानसभा चुनाव के मैदान में नहीं उतरे।

लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे, फिर भी चुनाव क्यों नहीं लड़ते हैं नीतीश?

1. विधान परिषद का विकल्प
बिहार उन छह राज्यों में शामिल है जहाँ विधान परिषद है।
इससे किसी भी नेता को बिना विधानसभा चुनाव लड़े भी मंत्री या मुख्यमंत्री बनने का रास्ता खुला रहता है।
नीतीश कुमार इस विकल्प का लगातार उपयोग करते रहे हैं।
2. 2000 में पहली बार CM बनने पर अनोखी स्थिति

2000 में जब वे पहली बार मुख्यमंत्री बने, तब वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे।

संविधान के अनुसार छह महीनों के भीतर उन्हें किसी सदन का सदस्य बनना था, लेकिन सिर्फ आठ दिनों में ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

इसके बाद उन्होंने सुरक्षित और स्थिर रास्ता चुनते हुए विधान परिषद सदस्यता को प्राथमिकता दी।

3. 2005 के बाद लगातार MLC

2005 में फिर से CM बनने पर उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ने के बजाय MLC बनने को चुना।

उनका पहला कार्यकाल 2012 में खत्म हुआ, फिर 2012 में दोबारा MLC बने।

2018 में तीसरी बार और 2024 में चौथी बार MLC चुने गए।

उनका वर्तमान MLC कार्यकाल मई 2030 तक है।

नीतीश कुमार खुद क्या कहते हैं?
2012 में बिहार विधान परिषद की शताब्दी समारोह में नीतीश कुमार ने कहा था:

“मैंने मजबूरी में नहीं, बल्कि अपनी इच्छा से MLC बनने का रास्ता चुना है। विधान परिषद एक सम्मानित संस्था है।”

2015 के चुनाव से पहले उन्होंने स्पष्ट किया था कि वे किसी एक सीट तक खुद को सीमित नहीं करना चाहते, इसलिए विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।

राजनीतिक सफर का संक्षिप्त इतिहास
विधानसभा चुनाव

लड़े: 1977, 1980, 1985, 1995

जीते: सिर्फ 1985

1995 के बाद विधानसभा चुनावों से दूरी

लोकसभा चुनाव

लगातार 6 बार जीत: 1989, 1991, 1996, 1998, 1999, 2004

2004 में बारह और नालंदा दोनों से लड़ा

नालंदा जीती—और इसी चुनाव के बाद उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा

मुख्यमंत्री कार्यकाल

नवंबर 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री

2014–15 में नौ महीने का ब्रेक (जीतनराम मांझी मुख्यमंत्री बने)

2015 में RJD के साथ लौटे

2017 में फिर NDA में शामिल

क्या 2025 के चुनाव में भी नीतीश लड़ेंगे सीट?
नहीं।
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव—6 और 11 नवंबर—से पहले ही नीतीश कुमार MLC बन चुके हैं, और उनका कार्यकाल 2030 तक है। इसलिए वे फिर से विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, पर मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार बने रहेंगे।