“Tharoor vs Congress: गांधी परिवार पर बयान से क्यों भड़की पार्टी, भाजपा ने उठाया मुद्दा?”

कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) के हालिया लेख ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है। अपने लेख “Indian Politics Are a Family Business” में थरूर ने भारत की वंशवादी राजनीति (Dynastic Politics) पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर नेहरू-गांधी परिवार (Nehru-Gandhi Family) का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत में राजनीति धीरे-धीरे “पारिवारिक व्यवसाय” का रूप ले चुकी है।
थरूर के इस बयान से कांग्रेस पार्टी में असहजता साफ दिख रही है, जबकि BJP ने इसे राहुल गांधी पर हमला बताकर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश शुरू कर दी है।

कांग्रेस नेताओं का पलटवार: “गांधी परिवार ने दी है कुर्बानी, न कि वंशवाद”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने थरूर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,

“पंडित नेहरू इस देश के सबसे सक्षम प्रधानमंत्री थे, इंदिरा गांधी ने बलिदान देकर अपनी देशभक्ति साबित की और राजीव गांधी ने भी जान गंवाकर देश सेवा की। अगर इसे वंशवाद कहा जा रहा है, तो फिर बताइए किस परिवार ने इतना बलिदान दिया?”

कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने भी थरूर का विरोध करते हुए कहा,

“किसी के पारिवारिक इतिहास की वजह से उसे राजनीति में आने से नहीं रोका जा सकता। आखिर लोकतंत्र में फैसला जनता ही करती है। डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बनता है, तो नेता का बेटा नेता क्यों नहीं बन सकता?”

वहीं कांग्रेस नेता उदित राज ने वंशवाद के आरोप को समाज की सच्चाई बताते हुए कहा कि,

“चुनाव टिकट अक्सर जाति और परिवार के आधार पर दिए जाते हैं, और ये सिर्फ कांग्रेस में नहीं बल्कि अन्य दलों में भी होता है। भाजपा और ममता बनर्जी जैसी पार्टियां भी इससे अछूती नहीं हैं।”

BJP का व्यंग्य: “Dr. Tharoor खतरे में हैं, First Family बदला लेगी”

BJP प्रवक्ता शहजाद जयहिंद ने सोशल मीडिया पर व्यंग्य करते हुए लिखा,

“शशि थरूर ने भारत के नेपो किड राहुल गांधी (Nepo Kid Rahul Gandhi) और तेजस्वी यादव पर सीधा वार किया है। डॉ. थरूर अब खतरों के खिलाड़ी बन गए हैं। मैं उनके लिए प्रार्थना करता हूं, क्योंकि कांग्रेस की ‘फर्स्ट फैमिली’ बदला लेना जानती है।”

भाजपा ने इसे कांग्रेस के अंदर की “Ideological Divide” करार देते हुए कहा कि थरूर जैसे नेता सच्चाई बोल रहे हैं, लेकिन पार्टी उन्हें चुप कराने में लग जाएगी।

विश्लेषण: क्या थरूर बन सकते हैं कांग्रेस के भीतर सुधार के प्रतीक?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि थरूर का यह बयान कांग्रेस की पुरानी समस्या – वंशवाद और Merit बनाम Loyalty Debate – को दोबारा उजागर करता है।
कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बयान आगामी Bihar Election और 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस की छवि पर असर डाल सकता है।