Himalaya Ek Sahitya Sammelan: A confluence of creativity, culture and environment in Nainital
सरोवर नगरी नैनीताल (Nainital) में बहुप्रतीक्षित ‘Himalaya Ek Sahitya Sammelan’ का भव्य शुभारंभ हुआ। तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में देशभर से 70 से अधिक प्रतिष्ठित साहित्यकार, लेखक, कलाकार और पर्यावरणविद शामिल हुए हैं। इस आयोजन को हिमालयी संस्कृति, पर्यावरण और रचनात्मक संवादों के एक जीवंत मंच के रूप में देखा जा रहा है।
Nepal से लेकर Bengal तक की रचनात्मक गूंज
सम्मेलन के पहले दिन Nepal के प्रसिद्ध लेखक Sujeev Shakya ने अपनी पुस्तक ‘Nepal 2043: The Road to Prosperity’ पर चर्चा की। उन्होंने नेपाल में चल रहे Zenji Movement और देश के विकास मॉडल पर विस्तार से विचार साझा किए।
लेखिका Anuradha Roy ने अपनी आने वाली पुस्तक के बारे में बात करते हुए कहा कि पहाड़ उनके लेखन और दृष्टिकोण को आकार देते हैं। वहीं, Bhutan की कलाकार Leki Tshewang ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर भूटानी, हिंदी और पहाड़ी गीत प्रस्तुत कर माहौल को मंत्रमुग्ध कर दिया।
तीसरे सत्र में Conservationist Neha Sinha और Journalist Gargi Rawat ने भारत के Wildlife Conservation पर गहन चर्चा की। उसके बाद Arundhati Nath और Niharika Bijli ने Bengali Ghost Stories की परंपरा पर रोचक वार्ता की।
कार्यक्रम के दौरान Jahnavi Prasad की नई पुस्तक ‘Nainital: Memories, Stories and History’ का विमोचन किया गया।
Culture, Literature और Environment पर संवाद
Prasad Bhavan में आयोजित पहले दिन के सत्रों में संस्कृति, साहित्य, पर्यावरण और समुदाय से जुड़े विषयों पर अनेक विचारोत्तेजक चर्चाएं हुईं। सम्मेलन की शुरुआत पारंपरिक शंखनाद और स्वागत भाषण से हुई।
आयोजक Jahnavi Prasad ने बताया कि “यह उत्सव दस साल पहले सिर्फ छह वक्ताओं और 50 श्रोताओं से शुरू हुआ था, और आज यह Himalayan Creativity and Community का सबसे प्रतिष्ठित मंच बन चुका है।” उन्होंने कहा कि यह आयोजन पहाड़ों, समुदायों और पर्यावरणीय संतुलन का उत्सव है, जो हमें जोड़ता है।
मुख्य वक्ता ने जोड़ा इतिहास और पर्यावरण का रिश्ता
मुख्य वक्ता और प्रसिद्ध कला इतिहासकार Dr. Alka Pande ने अपने संबोधन में History, Mythology और Ecology के गहरे संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि tribal knowledge systems हमें यह सिखाती हैं कि “Spirituality और Environment एक ही सत्य के दो पहलू हैं।” उन्होंने महाकवि Kalidas का उल्लेख करते हुए हिमालय को जीवंत आत्मा के रूप में देखने की प्रेरणा दी।
स्थानीय शिल्प और स्वाद का संगम
सम्मेलन स्थल पर लगे Kumaon Bazaar में स्थानीय Handicrafts, Textiles और Traditional Food लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे।
‘Piyoli’, ‘Pala’, ‘Myar’ और ‘Baini’ जैसे local brands के साथ-साथ Pickle Sickle और Rustic Slice Café की पेशकशों ने पर्यटकों को खूब लुभाया।
शाम को आयोजित सत्र में Nutrition Expert Rujuta Diwekar ने Kavita Khosa से भारतीय रसोई और Traditional Food Wisdom पर संवाद किया। दिन का समापन Sufi Music Performance – Rehmat-e-Nusrat से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।