Vegetable Price Hike Bareilly: बाढ़ से डूबी फसलें, मंडी में सब्जियों की किल्लत, रसोई का बजट बिगड़ा

Vegetable price hike Bareilly की वजह से आम परिवारों की जेब पर भारी असर पड़ रहा है। लगातार बारिश और बाढ़ के चलते बरेली समेत पूरे उत्तर प्रदेश में सब्जियों की फसल बर्बाद हो गई है। दूसरे राज्यों से सब्जियों की supply chain disruption भी हो रही है क्योंकि ट्रक रास्तों में फंसे हुए हैं। इसके चलते मंडियों में सब्जियों की आवक बेहद कम हो गई है और थोक बाजार में सब्जियों के दाम july vs september vegetable rates के मुकाबले दोगुने तक पहुंच गए हैं। कारोबारियों का कहना है कि फिलहाल दाम कम होने के कोई आसार नहीं हैं।

डेलापीर मंडी के व्यापारी असलम ने बताया कि पिछले एक हफ्ते से सब्जियों की आवक में भारी गिरावट आई है। टमाटर अब केवल बंगलूरू से आ रहा है, जबकि पंजाब में मटर की फसल बाढ़ के कारण नष्ट हो गई है। हिमाचल प्रदेश से गोभी नहीं आ रही, और उत्तराखंड से भी शिमला मिर्च, फूलगोभी तथा हरा धनिया जैसी सब्जियों की सप्लाई ठप है। वहीं, गृहिणी पारूल ने बताया कि जुलाई में परिवार के लिए सब्जियों पर लगभग चार हजार रुपये खर्च होते थे, जबकि अगस्त में यह खर्च बढ़कर छह हजार रुपये तक पहुंच गया है।

कीमतों में इज़ाफा – Kitchen Budget Crisis की तस्वीर

सब्जी जुलाई में दाम (रु./किलो) सितंबर में दाम (रु./किलो)
आलू 10 15
प्याज 10 17
टमाटर 8 20
लौकी 5 20
बैंगन 10 25
भिंडी 5 25
हरी मिर्च 10 30
शिमला मिर्च 20 25
हरा धनिया 20 100

(नोट: ये दरें थोक मंडी डेलापीर के अनुसार हैं।)

डेलापीर मंडी के व्यापारी सलीम खान ने बताया कि supply shortage की वजह से सब्जियों के दाम तेजी से बढ़े हैं। फिलहाल राहत मिलने की संभावना नहीं है। वहीं, गृहिणी रिंकी ने कहा कि महंगाई के चलते रसोई का खर्च बढ़ गया है और हर माह अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है।

बाढ़ का असर – Agriculture Loss और Health Concerns

किसानों का बड़ा हिस्सा बाढ़ में फसलों की क्षति से परेशान है। खेतों में जमा पानी और गाद की वजह से फसलें खराब हो गई हैं। इसका असर न केवल किसानों की आय पर पड़ा है, बल्कि आम उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की ज़रूरतों पर भी दिखाई दे रहा है। महंगे दामों ने परिवारों के kitchen budget crisis को और गंभीर बना दिया है। साथ ही ठेलों पर महंगाई की मार पड़ रही है, जिससे निम्न और मध्यम वर्ग की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।