Haridwar becomes the war room of Mission 2027, will the political mathematics change?
Parliament Monsoon Session के दौरान हुए Operation Sindoor पर विशेष चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री Amit Shah विपक्ष पर पूरी तरह हमलावर नजर आए। चर्चा के दौरान न सिर्फ मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा और कश्मीर नीति का बचाव हुआ, बल्कि ऐतिहासिक गलतियों का भी जिक्र किया गया —जिनमें खासतौर पर Pandit Jawaharlal Nehru का नाम प्रमुख रूप से सामने आया।
“नेहरू की भूल से गई थी अक्साई चिन”
गृह मंत्री Amit Shah ने संसद में कहा कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद 38,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र अक्साई चिन का हिस्सा चीन के कब्जे में चला गया। उन्होंने कहा कि उस वक्त प्रधानमंत्री नेहरू ने इसे यह कहकर नजरअंदाज कर दिया था कि “वहां घास का एक तिनका भी नहीं उगता।”
जब संसद में गूंजा ठहाका
इस संदर्भ में शाह ने संसद की एक ऐतिहासिक घटना को साझा करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा: “नेहरू जी का सिर भी मेरे जैसा गंजा था। उस समय सांसद महावीर प्रसाद त्यागी जी ने संसद में टोपी उतारकर अपने गंजे सिर की ओर इशारा करते हुए कहा था — ‘तो फिर आप यह भी चीन को दे दीजिए।’” इस बयान पर पूरे सदन में ठहाके गूंज उठे। लेकिन साथ ही इसने 1962 के युद्ध की विफलताओं और Aksai Chin Dispute को लेकर विपक्ष को कटघरे में खड़ा कर दिया।
कौन थे महावीर प्रसाद त्यागी?
Mahavir Tyagi, तीन बार लोकसभा सांसद और केंद्र में मंत्री रहे। वह भले ही Congress पार्टी के नेता थे, लेकिन नेहरू की विदेश और रक्षा नीति के प्रखर आलोचक भी रहे। 1962 में जब चीन ने भारत की ज़मीन पर कब्जा कर लिया, तब उन्होंने अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया था। संसद में उनके साहसिक और व्यंग्यात्मक वक्तव्य को आज भी याद किया जाता है।
पीएम मोदी ने भी नेहरू पर साधा निशाना
PM Modi ने भी चर्चा के दौरान कहा कि आज जो लोग हमसे पूछते हैं कि POK (Pakistan-Occupied Kashmir) क्यों नहीं लिया, उन्हें पहले यह बताना चाहिए कि पाकिस्तान को POK पर कब्जा करने का मौका किसने दिया? उन्होंने कहा कि भारत की पूर्ववर्ती सरकारों की भूलों की वजह से आज देश को कई सुरक्षा और कूटनीतिक मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
Amit Shah’s Parliament Speech ने न सिर्फ इतिहास को याद दिलाया, बल्कि यह भी दिखाया कि आज की सरकार पूर्व की नीतियों से कैसे खुद को अलग दिखाना चाहती है। अक्साई चिन, पीओके और भारत-चीन सीमा विवाद जैसे मुद्दों को लेकर यह चर्चा आगे चलकर राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकती है।