Big blow to CBI: SC approves release of Pandher and Koli in Nithari case, know why they could not get punishment for the massacre of 16 children?
Supreme Court on Nithari Case: साल 2006 में देश को दहला देने वाले निठारी हत्याकांड (Nithari Killings) में CBI और पीड़ितों के परिजनों को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब Supreme Court ने बुधवार को Surendra Koli और Moninder Singh Pandher की रिहाई के खिलाफ दाखिल 14 याचिकाएं खारिज कर दीं।
यह वही केस है जिसमें नोएडा सेक्टर-31 के बंगले से 16 बच्चों के कंकाल और अवशेष बरामद हुए थे और पूरे देश में सनसनी फैल गई थी।
SC का स्पष्ट संदेश: “इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला सही है”
मुख्य न्यायाधीश DY Chandrachud की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में कोई खामी नहीं है। CBI की 12 याचिकाएं और पीड़ितों के परिजनों की 2 अपीलें कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दीं कि बरी करने के निर्णय को पलटने के लिए “संदेह से परे” दोष सिद्ध करना आवश्यक है –जो इस केस में साबित नहीं हो सका।
आखिर क्यों बरी हुए Pandher और Koli?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2023 में फैसला सुनाते हुए कहा था कि “अभियोजन पक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा और जांच बेहद लचर थी।” कोर्ट ने कहा कि सिर्फ उन साक्ष्यों को स्वीकार किया जा सकता है जो आरोपियों की निशानदेही पर उनके नियंत्रण वाले स्थान से मिले हों। CBI और वकीलों की ओर से नाले से बच्चों की खोपड़ियों और सामान की बरामदगी का जिक्र किया गया, लेकिन अभियुक्तों के बयानों के कानूनी मान्यता न मिलने के कारण यह कमजोर पड़ गया।
क्या है पूरा मामला?
29 दिसंबर 2006 को नोएडा के निठारी में पंढेर के घर के पीछे एक नाले से बच्चों के कंकाल मिले थे।
जल्द ही पता चला कि ये अवशेष आसपास के गरीब परिवारों के लापता बच्चों के हैं। Surendra Koli, पंढेर का घरेलू नौकर था और उसे 28 सितंबर 2010 को मौत की सज़ा दी गई थी। कुल 19 केस दर्ज हुए, जिनमें 16 पर सुनवाई चली और 12 में कोली को फांसी सुनाई गई थी। CBI ने 3 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
हाईकोर्ट ने कहा कि:“जांच एजेंसियों ने जनता के विश्वास के साथ धोखा किया है।” यह टिप्पणी सीधे तौर पर CBI की जांच की आलोचना थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि “मामला पूरी तरह से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था, जो मजबूत नहीं थे।”
कांग्रेस ने बोला हमला, कहा – “ये है जांच एजेंसियों की नाकामी”
Nithari Case Supreme Court Verdict पर कांग्रेस समेत कई विपक्षी नेताओं ने सरकार और जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। पीड़ित परिवारों में भी नाराज़गी है कि “इतने बड़े नरसंहार के बाद भी न्याय नहीं मिला।”
Nithari Murder Case भारतीय न्याय प्रणाली के सामने एक ऐसा उदाहरण बनकर सामने आया है जहाँ गंभीर अपराध के बावजूद सज़ा नहीं हो सकी, और अदालत ने “संदेह का लाभ” देते हुए दोनों आरोपियों को बरी कर दिया। यह मामला न केवल जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठाता है, बल्कि देश की गरीब और हाशिए पर खड़ी आबादी को न्याय दिलाने की संवेदनशीलता पर भी।