Uttarakhand GST Growth: Record 17% jump in August, will earnings increase due to festivals?
Goods and Services Tax (GST) में structure simplification की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी हो रही है। केंद्र सरकार 12% GST स्लैब को खत्म करने पर विचार कर रही है। इसके तहत कुछ प्रोडक्ट्स को 5% और कुछ को 18% टैक्स ब्रैकेट में शिफ्ट किया जाएगा। यह फैसला multi-rate GST system को सरल बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
अमित शाह बनाएंगे सहमति का रास्ता
चूंकि यह मुद्दा कई राज्यों की राजस्व चिंता और राजनीतिक असहमति से जुड़ा है, इसलिए केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah को अब एक्टिव भूमिका दी गई है। सूत्रों के अनुसार, शाह जल्द ही राज्यों, मंत्रालयों और जीएसटी काउंसिल से जुड़े सभी stakeholders से चर्चा शुरू करेंगे ताकि इस पर broad consensus बनाया जा सके।
अमित शाह पहले भी disinvestment, food inflation जैसे जटिल मामलों में सरकार के लिए political bridge की भूमिका निभा चुके हैं।
बदलाव आसान नहीं: क्यों उठ रहे हैं विरोध के स्वर?
GST Implementation को आठ साल पूरे हो चुके हैं और अब सिस्टम धीरे-धीरे स्थिरता की ओर बढ़ रहा है। लेकिन 12% स्लैब को खत्म करने की योजना में राजस्व घाटा (Revenue Loss) सबसे बड़ी चुनौती है।
➡ अनुमान है कि इस बदलाव से केंद्र और राज्य मिलाकर ₹70,000 से ₹80,000 करोड़ का सालाना घाटा हो सकता है।
➡ इस पर कुछ राज्य सहमत नहीं हैं — खासकर विपक्षी राज्य, जो जीवन बीमा और हेल्थ इंश्योरेंस जैसे सेक्टर में GST को कम करने या पूरी तरह हटाने की मांग कर रहे हैं।
GST दरों का वर्तमान ढांचा
0%, 5%, 12%, 18%, और 28%
कुछ विशेष वस्तुओं पर Cess
कीमती धातुओं पर Special Provisions
GST Council में 2021 से दरों के rationalisation की चर्चा चल रही है। हालांकि, फरवरी 2024 में भी 12% स्लैब को बनाए रखने का प्रस्ताव आया था, जो सरलीकरण की दिशा के विपरीत था।
12% GST स्लैब में कौन-कौन सी चीजें आती हैं?
अगर 12% स्लैब हटाया गया तो इन उत्पादों पर असर पड़ सकता है: