Save Nimisha Priya: ₹8 करोड़, शिक्षा-मेडिकल मदद भी बेअसर, मां बोलीं- चमत्कार की उम्मीद है

Yemen में मौत की सजा झेल रहीं भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के जीवन को बचाने की कोशिशें लगातार जारी हैं, लेकिन एक बड़ी बाधा अब भी सामने खड़ी है—पीड़ित परिवार का ब्लड मनी स्वीकार न करना। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ₹8 करोड़ की पेशकश के बावजूद तलाल अब्दो महदी के परिवार ने अब तक क्षमादान की कोई सहमति नहीं दी है।

क्या है मामला?

2017 में निमिषा प्रिया को यमन के नागरिक और उनके पूर्व बिजनेस पार्टनर तलाल अब्दो महदी की हत्या का दोषी ठहराया गया था। 2020 में यमन की अदालत ने उन्हें Death Sentence सुनाई थी, जिसे नवंबर 2023 में Supreme Judicial Council of Yemen ने भी बरकरार रखा।

ब्लड मनी क्या है, और क्यों है इतना अहम?

यमन की Islamic Legal System में, अगर Victim’s Family ब्लड मनी (जिसे “Diyat” भी कहा जाता है) स्वीकार कर ले, तो दोषी को क्षमादान मिल सकता है। यह एक तरह का Financial Compensation होता है, जो जीवन बचाने का अंतिम रास्ता हो सकता है।

Telegraph India की रिपोर्ट बताती है कि Save Nimisha Priya International Action Council की ओर से ₹8 करोड़ के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अन्य मानवीय सहयोग की पेशकश की गई है।

लेकिन Council की उपाध्यक्ष दीपा जोसेफ के अनुसार, पीड़ित परिवार ने अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया है। उनका कहना है,

“हम हरसंभव प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्वीकार्यता नहीं मिली है। उम्मीद है गुरुवार तक सना से कुछ अच्छी खबर मिले।”

यमन का राजनीतिक संकट बना बाधा

Sana, जहां निमिषा कैद हैं, इस वक्त ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के नियंत्रण में है। इससे Indian Embassy और राजनयिक चैनलों के प्रभाव में भारी कमी आई है।
निमिषा की मां प्रेमकुमारी, जो अप्रैल से यमन में हैं, बेटी की रिहाई के लिए हर मोर्चे पर प्रयास कर रही हैं। वहीं प्रिया की 12 वर्षीय बेटी और पति केरल के Idukki जिले में हैं और हर दिन एक उम्मीद के सहारे जी रहे हैं।

न्यायिक विकल्प अब लगभग समाप्त

Nimisha Priya, जो केरल के पलक्कड़ जिले की निवासी हैं, ने सभी कानूनी विकल्प आज़मा लिए हैं। Yemen Supreme Council द्वारा Final Appeal खारिज हो जाने के बाद अब केवल मानवीय आधार और क्षमा याचिका ही बची है।