West Bengal Re-Polling: Voting resumes at 15 booths; find out why the decision was made to re-poll.
One Nation One Election यानी देशभर में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की योजना को लेकर भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों (Former Chief Justices of India) ने अपनी राय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को सौंपी है। उन्होंने इसे संविधान के विरुद्ध नहीं माना, लेकिन साथ ही Election Commission of India (ECI) को दी जाने वाली असीमित शक्तियों (unbridled powers) पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
क्या कहते हैं जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़?
Chief Justice of India रह चुके Justice D.Y. Chandrachud ने अपनी राय में कहा कि संविधान में कहीं यह नहीं लिखा है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग ही होने चाहिए।
उन्होंने विपक्ष की इस आलोचना को खारिज किया कि simultaneous elections संविधान के basic structure का उल्लंघन है।
“साथ में चुनाव कराना संविधान का उल्लंघन नहीं है। मतदाता का अधिकार प्रभावित नहीं होता।” — Justice D.Y. Chandrachud
लेकिन ECI की ताकतों पर जताई गई चिंता
Justice Chandrachud ने चेतावनी दी कि विधेयक में ECI को दी गई शक्तियां “unlimited discretion” दे सकती हैं, जिससे आयोग राज्य विधानसभा के कार्यकाल को घटाने या बढ़ाने की स्थिति में आ सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि संविधान में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ECI कब, कैसे और किन परिस्थितियों में ऐसी शक्ति का प्रयोग कर सकता है।
चरणबद्ध चुनाव की वकालत
पूर्व CJI Justice U.U. Lalit ने सुझाव दिया कि चुनाव एक साथ नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीके से कराए जा सकते हैं। उन्होंने आगाह किया कि अगर बची हुई विधानसभाओं का कार्यकाल छोटा किया गया तो वह legally challengeable हो सकता है।
Justice Ranjan Gogoi भी सहमत
Justice Ranjan Gogoi, जिन्होंने फरवरी में समिति के सामने पेश होकर राय दी थी, उन्होंने भी कहा कि ECI को दी गई शक्तियां सदस्यों के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने समिति की चिंता को वाजिब बताया।
मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहेंगे
Justice Chandrachud ने साफ किया कि एक साथ चुनाव कराने से मतदाताओं के representation rights पर कोई असर नहीं होगा। विधेयक सुनिश्चित करता है कि हर नागरिक का प्रतिनिधित्व निर्वाचित सांसद या विधायक के ज़रिए बना रहेगा।
‘क्रमिक चुनाव’ संविधान का मूल ढांचा नहीं
Justice Chandrachud ने कहा कि यह तर्क कि frequent or staggered elections संविधान का हिस्सा हैं, संवैधानिक रूप से टिकाऊ नहीं है।
“चुनाव का टाइमिंग संविधान की अपरिवर्तनीय विशेषता नहीं है।” — Justice Chandrachud
लेकिन छोटे दलों को लेकर चिंता
Justice Chandrachud ने आगाह किया कि simultaneous elections से national parties को फायदा हो सकता है, जबकि regional या small parties हाशिये पर जा सकती हैं। उन्होंने मांग की कि चुनावी खर्च और प्रचार पर uniform regulations लागू किए जाएं ताकि सभी पार्टियों को level playing field मिले।
उन्होंने कहा कि भले ही Representation of the People Act, 1951 में उम्मीदवारों के खर्च की सीमा है, लेकिन political parties के overall spending पर कोई limit नहीं है। यह फर्क बड़े दलों को फायदा पहुंचाता है।