पुतिन को ICC का डर, शी जिनपिंग की चुप्पी: BRICS समिट में कौन बोलेगा दक्षिण की आवाज़?
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस बार ब्राजील में 6-7 जुलाई को होने वाले BRICS Summit 2025 में व्यक्तिगत रूप से शिरकत नहीं करेंगे। क्रेमलिन ने बुधवार को स्पष्ट किया कि यह फैसला ICC (International Criminal Court) द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा:
“पुतिन शिखर सम्मेलन में वीडियो लिंक के जरिए हिस्सा लेंगे क्योंकि ब्राजील सरकार उनकी सुरक्षा की गारंटी देने में असमर्थ रही।”
ICC वारंट बना पुतिन की विदेश यात्राओं में बाधा
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मार्च 2023 में ICC ने पुतिन के खिलाफ युद्ध अपराध के आरोप में गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
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उन पर यूक्रेनी बच्चों के अवैध निर्वासन का आरोप है।
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रूस ICC का सदस्य नहीं है, लेकिन ब्राजील Rome Statute का हस्ताक्षरकर्ता है, इसलिए कानूनी रूप से पुतिन की गिरफ्तारी बाध्यकारी होती।
इस स्थिति को देखते हुए रूस ने BRICS सम्मेलन में भागीदारी के लिए विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को भेजने का निर्णय लिया है।
Xi Jinping भी नहीं जाएंगे ब्राजील, क्या चीन भी बना रहा है दूरी?
रूस के बाद अब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी BRICS सम्मेलन में न जाने की संभावना है।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, शी जिनपिंग की जगह प्रधानमंत्री ली क्विंग चीन का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।
हालांकि चीनी विदेश मंत्रालय ने इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की, लेकिन संकेत स्पष्ट हैं कि शी इस बार ब्राजील यात्रा से परहेज करेंगे – यह एक दशक में पहली बार होगा जब वह BRICS समिट में शारीरिक रूप से मौजूद नहीं होंगे।
पश्चिम के दबाव में हैं BRICS लीडर्स?
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पुतिन पहले भी 2023 में दक्षिण अफ्रीका के BRICS समिट में नहीं गए थे।
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ICC सदस्य देशों में यात्रा करना उनके लिए जोखिम भरा बन चुका है।
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मंगोलिया जैसे देशों ने भी उन्हें गिरफ्तार नहीं किया, लेकिन यूरोपीय संघ और ICC की आलोचना झेलनी पड़ी।
इस बार शी जिनपिंग की अनुपस्थिति को भी कूटनीतिक दबाव और वैश्विक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
BRICS: Global South की आवाज़, लेकिन लीडर्स अनुपस्थित क्यों?
BRICS (Brazil, Russia, India, China, South Africa) अब 11 देशों का समूह बन चुका है, जो खुद को पश्चिमी प्रभुत्व के खिलाफ एक संतुलित वैश्विक मंच के रूप में प्रस्तुत करता है।
लेकिन दो प्रमुख नेता – रूस और चीन – जब एक ही मंच से दूर हो रहे हों, तो सवाल उठना लाज़मी है:
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क्या BRICS के अंदरूनी समीकरण बदल रहे हैं?
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क्या अंतरराष्ट्रीय दबावों के आगे BRICS की नैतिक ताकत कमजोर पड़ रही है?
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और सबसे अहम: क्या भारत इस शून्य को भरने के लिए आगे आएगा?