गोरखपुर मर्डर केस: बेटे ने रची साजिश, पुलिस ने खोला ऐसा राज कि उड़ गए होश

गोरखपुर के चौरीचौरा क्षेत्र के बिलारी गांव में हुई एक दिल दहला देने वाली वारदात में राजेंद्र यादव की हत्या का आरोप उनके ही बेटे धर्मेंद्र यादव पर सिद्ध हुआ है। इस चौंकाने वाले खुलासे ने उस वक्त और भी ज्यादा सनसनी फैला दी, जब सामने आया कि धर्मेंद्र ने खुद हत्या कर 14 बेगुनाहों को फंसाने की कोशिश की थी, जिनमें पड़ोसी और रिश्तेदार तक शामिल थे।

क्या है पूरा मामला?

15 जून की रात 65 वर्षीय राजेंद्र यादव की कुल्हाड़ी से वार कर हत्या कर दी गई थी। 16 जून को उनके बेटे धर्मेंद्र यादव ने 10 नामजद और 4 अज्ञात लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। एफआईआर में उसने जमीन विवाद को हत्या की वजह बताया।

लेकिन जब पुलिस ने मौके पर सीन री-क्रिएशन और टेक्निकल जांच की तो नामजद लोगों के बयानों और CDR लोकेशन में भारी विरोधाभास मिला। इसके बाद पुलिस का शक बेटे पर गहराया और पूछताछ में धर्मेंद्र ने अपना जुर्म कबूल कर लिया

कुल्हाड़ी भी घर में ही छिपा रखी थी

धर्मेंद्र की निशानदेही पर पुलिस ने खून से सनी कुल्हाड़ी बरामद की, जिसे उसने घर में ही छुपा दिया था। पूछताछ में उसने बताया कि पिता बेरोजगारी को लेकर लगातार ताने मारते थे और नौकरी के लिए बाहर भेजने का दबाव बना रहे थे। साथ ही, उसे लग रहा था कि यदि पिता हट जाएंगे तो जमीन विवाद खत्म हो जाएगा।

14 निर्दोषों को बना दिया था आरोपी

धर्मेंद्र ने एफआईआर में जिन 14 लोगों के नाम लिखवाए, उनमें से कुछ उसके पड़ोसी, रिश्तेदार, और एक पूर्व सैनिक भाई दिनेश यादव के जानने वाले थे। उसका मकसद था कि पुरानी रंजिश वाले सभी लोग जेल जाएं और वह खुद जमीन का मालिक बन जाए

एसएसपी राजकरन नय्यर ने कहा कि “पुलिस ने जल्दबाजी से बचते हुए वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित खुलासा किया। इसी वजह से बेगुनाह लोगों की इज्जत बचाई जा सकी।”

खुद को बताया था चश्मदीद, कहानी में झोल से हुआ खुलासा

धर्मेंद्र ने खुद को इस केस का चश्मदीद भी बनाने की कोशिश की। उसने FIR में लिखा कि “पिता पर चाकू से वार होते देख मैं जाग गया, मैं दौड़ा तो आरोपियों ने मेरे सामने भी हमला किया और भाग गए।”

हालांकि, जब उसके छोटे भाई मोहन यादव से पुलिस ने अलग से पूछताछ की, तो उसने बताया कि शोर सुनकर वह पहले पहुंचा था, जबकि धर्मेंद्र बाद में आया।

यही विरोधाभास पुलिस के लिए ब्रेकिंग पॉइंट बन गया।