Snana Purnima 2025: क्यों महाप्रभु जगन्नाथ आज होते हैं बीमार? जानिए रहस्य
पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ धाम में इस वर्ष देवस्नान पूर्णिमा (Snana Purnima 2025) के पावन अवसर पर बुधवार सुबह से ही भारी संख्या में श्रद्धालु जुटने लगे। जय जगन्नाथ के जयकारों से पूरा बड़दांड क्षेत्र गूंज उठा। मंदिर के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए, पूरे शहर को CCTV Surveillance में रखा गया।
चतुर्धामूर्ति को स्नान: 108 Kalash Jal से हुआ अभिषेक
शास्त्रों के अनुसार, देवस्नान पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को 108 कलशों में संग्रहित सुगंधित जल (Scented Water) से स्नान कराया जाता है। यह जल स्वर्णकुआं (Golden Well) से लाया जाता है। इस स्नान के दौरान चतुर्धामूर्ति रत्नवेदी से स्नान वेदी तक ‘पहंडी’ में लाए जाते हैं।
Elephant Form Darshan: महाप्रभु के अद्भुत स्वरूप के दर्शन
स्नान के पश्चात भगवान जगन्नाथ भक्तों को हाथी वेश (Elephant Avatar) में दर्शन देते हैं, जिसे हाथी बेश या गजवेश कहा जाता है। इस दुर्लभ दर्शन को देखने के लिए श्रद्धालु स्वयं को धन्य मानते हैं। यह रूप मूल रूप में नहीं बल्कि श्रृंगार और वस्त्रों से रचा गया विशेष वेश होता है।
स्नान के बाद बीमार होते हैं भगवान: शुरू होता है Anavasar Period
देवस्नान के बाद मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ बुखार से पीड़ित हो जाते हैं और फिर वह 14 दिनों तक ‘अणवसर गृह’ (Anavasar Gruha) में विश्राम करते हैं। इस दौरान उन्हें राज वैद्य द्वारा गुप्त उपचार दिया जाता है। भक्तों को इस समय भगवान के दर्शन नहीं होते।
पुरी में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
Lakhs of devotees की उपस्थिति को देखते हुए पुरी जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए।
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70 पुलिस प्लाटून और एक सेक्शन फोर्स को तैनात किया गया।
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ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए Traffic Restrictions लागू किए गए।
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IG सेंट्रल जोन, पुरी SP और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने सुरक्षा की समीक्षा की।
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गर्मी और उमस को ध्यान में रखते हुए Water Supply Stations की व्यवस्था की गई।