फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट ने फरीदाबाद के बीके अस्पताल में की 55 लोगों की हार्ट सर्जरी, मचा हड़कंप

दिल्ली के नजदीक फरीदाबाद के बीके अस्पताल के हार्ट सेंटर (Heart Center) में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। एमबीबीएस डॉक्टर पंकज मोहन ने बिना विशेषज्ञ कार्डियोलॉजिस्ट (Cardiologist) होने के बावजूद, अपने हमनाम असली डॉक्टर का नाम इस्तेमाल कर 55 से अधिक लोगों की एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) और एंजियोग्राफी (Angiography) कर डाली।

वेरिफिकेशन में बड़ी चूक, डॉक्टर ने जाली तरीके से की नौकरी हासिल

हरियाणा सरकार की अनुबंध कंपनी मेडिट्रीना हॉस्पिटल्स प्राइवेट लिमिटेड और अस्पताल के प्रशासन द्वारा डॉक्टर की नियुक्ति से पहले वेरिफिकेशन (Verification) करना अनिवार्य होता है। लेकिन आरोप है कि एमबीबीएस डॉक्टर पंकज मोहन की नियुक्ति के वक्त इस प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही हुई।

3 मरीजों की मौत का भी मामला

डॉक्टर के कथित गलत इलाज के कारण बीके अस्पताल के हार्ट सेंटर में इलाज कराने आए कम से कम तीन मरीजों की मौत हो चुकी है। इस गंभीर मामले को लेकर एडवोकेट संजय गुप्ता ने अप्रैल 2025 में थाना एसजीएम नगर में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अब उन्होंने शिकायत सीएम विंडो और हरियाणा गृह मंत्रालय को भी भेजी है।

अस्पताल ने डॉक्टर को हटाया, जांच जारी

बीके अस्पताल के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) मामले की जांच कर रही है, इसलिए फिलहाल कार्रवाई पर रोक लगी है।

मेडिट्रीना हॉस्पिटल्स के मुख्य प्रबंध निदेशक डॉ. एन प्रताप ने बताया कि जांच शुरू होने के बाद अस्पताल ने हार्ट सेंटर को बंद कर दिया है और डॉक्टर को हटा दिया गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि नियुक्ति के दौरान HR विभाग ने डॉक्टर का वेरिफिकेशन ठीक से नहीं किया।

डॉक्टर की नियुक्ति और आरोपों का पूरा विवरण

  • हार्ट सेंटर की शुरुआत: 2018 में बीके अस्पताल में पीपीपी मोड पर मेडिट्रीना हॉस्पिटल्स को हार्ट सेंटर चलाने का ठेका मिला।

  • डॉक्टर की नियुक्ति: जुलाई 2024 में पंकज मोहन शर्मा को नियुक्त किया गया, जो फरवरी 2025 तक काम करता रहा।

  • आरोप: बीपीएल, आरक्षित वर्ग और आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार के साथ भी अस्पताल ने धोखाधड़ी की है।

मामला कैसे उजागर हुआ?

एडवोकेट संजय गुप्ता के अनुसार, एक मरीज को जब पता चला कि असली डॉक्टर पंकज मोहन छुट्टी पर हैं, तो उन्होंने सेंटर के एक कर्मचारी से संपर्क किया, जिसने बताया कि डॉक्टर गांधी कॉलोनी में क्लीनिक चलाते हैं। जब मरीज ने असली डॉक्टर से बात की, तो यह फर्जीवाड़ा सामने आ गया।