India stands against terrorism, will deal with Pakistan directly: Big statement by Foreign Minister
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि भारत आतंकवाद को किसी भी हालत में सहन नहीं करेगा और nuclear blackmail के आगे कभी नहीं झुकेगा। जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान जयशंकर ने यह स्पष्ट किया कि भारत पाकिस्तान से पूरी तरह द्विपक्षीय तरीके से निपटेगा और किसी को इस पर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए।
Pahalgam Terror Attack के बाद पहली विदेश यात्रा में भारत की सख्त कूटनीतिक लाइन
जयशंकर ने कहा कि वह पाहलगाम आतंकी हमले के बाद सीधे बर्लिन पहुंचे हैं और उन्होंने जर्मन नेतृत्व को स्पष्ट रूप से बता दिया है कि भारत की प्रतिक्रिया किसी भी प्रकार के “regret” के साथ नहीं आई है, बल्कि यह अपने नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए जरूरी थी।
उन्होंने साफ कहा:
“भारत कभी भी आतंकवाद के आगे नहीं झुकेगा। हम किसी भी रूप में परमाणु ब्लैकमेल स्वीकार नहीं करेंगे।”
भारत की नई नीति: Cross-Border Terrorism = Act of War
पाहलगाम हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया है कि भारत अब सीमा पार से होने वाले किसी भी आतंकी हमले को ‘युद्ध की कार्रवाई’ मानेगा। 22 अप्रैल को 26 लोगों की निर्मम हत्या के बाद भारत की प्रतिक्रिया केवल सैन्य नहीं, बल्कि कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर भी बेहद तीव्र रही है।
“यह कश्मीर विवाद नहीं, आतंकवाद के खिलाफ युद्ध है” – जयशंकर का डेनमार्क में बयान
डेनमार्क के अखबार Politiken को दिए इंटरव्यू में जयशंकर ने कहा:
“यह भारत-पाकिस्तान के बीच कोई पारंपरिक कश्मीर विवाद नहीं है। यह 22 अप्रैल को पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा की गई बर्बरता का जवाब है।”
पश्चिम पर तंज: “Democracy Lovers” ने Military Dictators को क्यों दिया समर्थन?
जयशंकर ने पश्चिमी देशों की भूमिका पर भी सवाल उठाया और कहा कि यूरोप जो खुद को लोकतंत्र का संरक्षक मानता है, वह पिछले कुछ दशकों से पाकिस्तान के सैन्य तानाशाहों का साथ देता रहा है।
“1947 से पाकिस्तान हमारी सीमाओं का उल्लंघन करता आया है, लेकिन पश्चिम ने बार-बार लोकतंत्र के बजाय सैन्य शासकों का साथ दिया है।”
रूस से ईंधन खरीद पर दोहरा मापदंड क्यों?
जयशंकर ने ईंधन के मुद्दे पर यूरोप को आईना दिखाते हुए कहा कि यूरोपीय देश खुद रूस से तेल खरीदते हैं, लेकिन जब भारत ऐसा करता है तो नैतिकता का पाठ पढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि ईंधन कीमतें बढ़ाकर यूरोप भारत जैसे विकासशील देशों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है।