Supreme Court ने रेप दोषी को दी राहत, कहा-पीड़िता ने नहीं माना अपराध!

Supreme Court ने शुक्रवार को एक POCSO convict को सजा से मुक्त कर दिया, जिसने पहले नाबालिग लड़की का sexual assault किया था, लेकिन बाद में उससे शादी कर ली और अब दोनों की एक बेटी भी है।

Justice A.S. Oka और Justice Ujjal Bhuyan की बेंच ने Article 142 of the Constitution के तहत विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए कहा कि हालांकि आरोपी दोषी है, लेकिन उसे सजा नहीं दी जाएगी

पीड़िता को कानून, समाज और परिवार – तीनों ने असफल किया : SC

Court ने कहा कि यह मामला legal system और समाज दोनों के लिए wake-up call है।

“समाज ने पीड़िता को आंका, कानून ने साथ नहीं दिया, और परिवार ने उसे त्याग दिया। अब वह अपने पति को बचाने के लिए पूरी तरह समर्पित हो चुकी है।”

Court ने माना कि legal rape definition के तहत अपराध तो हुआ, लेकिन पीड़िता को सबसे ज्यादा दर्द कानूनी और सामाजिक प्रक्रियाओं से मिला।

POCSO Court ने दी थी 20 साल की सजा, SC ने क्यों पलटा फैसला

Lower court ने आरोपी को 20 साल की rigorous imprisonment और ₹10,000 का जुर्माना सुनाया था। लेकिन Supreme Court ने हालातों को देखते हुए फैसला पलट दिया।

Court ने कहा कि:

  • अब आरोपी और पीड़िता की शादी हो चुकी है।

  • उनके एक बेटी है, और पीड़िता ने खुद आरोपी को बचाने की अपील की है।

  • पीड़िता अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती है।

 SC का राज्य सरकार को निर्देश: पीड़िता को Shelter और Education दो

Supreme Court ने West Bengal Government को आदेश दिया कि:

  • पीड़िता और उसकी बच्ची को safe shelter प्रदान किया जाए।

  • Class 10 से लेकर Graduation तक की free education दी जाए।

  • पीड़िता की पसंद के vocational course में दाखिला दिलाया जाए।

 सिस्टम की कमियां उजागर करती घटना – SC

Justice ओका ने कहा:

“यह घटना बताती है कि criminal justice system कैसे पीड़िता को और ज़्यादा पीड़ित बना सकता है। कानून से आगे बढ़कर भी इंसान की परिस्थितियों को समझना ज़रूरी है।”

Supreme Court ने यह भी कहा कि Women’s Agency, उनकी personal freedom और emotional reality को अब कानून के फैसलों में जगह मिलनी चाहिए।

 Committee का गठन, Ministry को Action Plan सौंपने के निर्देश

Court ने Ministry of Women and Child Development के सचिव को निर्देश दिया कि वे एक expert committee बनाएं जो इस केस की systemic review कर सके। Committee को 15 जुलाई तक रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।