Owaisi on India-Pak Ceasefire: क्या अमेरिका की भूमिका से कश्मीर मुद्दा अंतरराष्ट्रीय हो रहा है?
भारत और पाकिस्तान के बीच Ceasefire Agreement के ऐलान के बाद जहां एक ओर देशभर में राहत की सांस ली गई, वहीं दूसरी ओर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं। ओवैसी ने Pahalgam आतंकी हमले की पृष्ठभूमि में कहा कि जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से आतंकी भेजना बंद नहीं करता, तब तक किसी भी तरह की स्थायी शांति की उम्मीद बेमानी है।
“सीजफायर से राहत नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए”
ओवैसी ने कहा:
“सीजफायर हो या न हो, जो आतंकी इस हमले के ज़िम्मेदार हैं, उनका पीछा करके सज़ा दी जानी चाहिए। शांति सिर्फ कागज़ों पर नहीं, ज़मीन पर दिखनी चाहिए।”
उन्होंने शहीद जवान एम. मुरली नाइक और एडिशनल डिप्टी कमिश्नर राजकुमार थापा को श्रद्धांजलि देते हुए सेना की बेबाक बहादुरी की तारीफ की। साथ ही उन्होंने आम नागरिकों के जज़्बे की सराहना की जो इस संघर्ष में घायल या शहीद हुए।
ओवैसी का सरकार से सवाल: ट्रंप क्यों बने प्रवक्ता?
AIMIM प्रमुख ने सरकार से यह जानना चाहा कि:
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भारत और पाकिस्तान के बीच Ceasefire का ऐलान भारतीय प्रधानमंत्री की बजाय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों किया?
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क्या यह शिमला समझौते की भावना के खिलाफ नहीं है, जिसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को भारत ने सिरे से नकारा था?
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बातचीत अगर तटस्थ स्थल पर हो रही है, तो क्या कश्मीर मुद्दा इंटरनेशनलाइज़ नहीं हो रहा?