उत्तराखंड में पहले क्यों होगी जनगणना? चुनावी तैयारियों के बीच बदला Census का कैलेंडर

उत्तराखंड में 2027 Assembly Elections की तैयारियों के बीच जनगणना को लेकर भी प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। केंद्र सरकार ने राज्य में Census 2027 के कार्यक्रम में बदलाव किया है। सामान्य क्षेत्रों में होने वाली जनगणना अब फरवरी 2027 के आसपास होने के बजाय दिसंबर 2026 से शुरू होगी। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव और प्रशासनिक तैयारियों के बीच काम के टकराव को कम करना बताई जा रही है।

उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश, पंजाब और गोवा में भी 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में इन राज्यों में Census और Election Preparation एक साथ होने की स्थिति से बचने के लिए जनगणना का कार्यक्रम पहले रखने की योजना बनाई गई है।

दिसंबर से जनवरी तक होगी जनगणना

उत्तराखंड के मैदानी और सामान्य क्षेत्रों में Census Enumeration का काम 1 दिसंबर 2026 से शुरू होकर 4 जनवरी 2027 तक चलेगा। इसके बाद 5 से 9 जनवरी तक Cross Verification की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

इस बदलाव का उद्देश्य यह है कि विधानसभा चुनावों की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रशासन जनगणना से जुड़े जरूरी काम पूरे कर सके। इससे चुनाव के दौरान सरकारी मशीनरी का पूरा ध्यान Election Duty और उससे संबंधित व्यवस्थाओं पर लगाया जा सकेगा।

उत्तराखंड के साथ इन राज्यों में भी चुनाव

उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, पंजाब और गोवा में भी 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों में चुनावी तैयारियां और जनगणना एक ही समय पर होने की स्थिति में प्रशासन के सामने अतिरिक्त जिम्मेदारियां आ सकती थीं।

इसी वजह से इन चार राज्यों के लिए Census Schedule में बदलाव किया गया है। पहले जनगणना का सामान्य चरण फरवरी 2027 के आसपास प्रस्तावित था, लेकिन अब इन चुनावी राज्यों में इसे पहले पूरा करने की तैयारी है।

चार पहाड़ी जिलों में इसी साल होगी जनगणना

उत्तराखंड के ऊंचाई वाले और दुर्गम क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ को Non-Synchronous Areas की श्रेणी में रखा गया है।

इन जिलों में जनगणना का काम 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 के बीच पूरा करने की योजना है। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इन इलाकों के लिए अलग समय-सारणी रखी गई है।

पहली बार Self Enumeration की सुविधा

Census 2027 में पहली बार लोगों को Self Enumeration की सुविधा भी दी जा रही है। इसके तहत लोग अपने घर और परिवार से जुड़ी जरूरी जानकारी खुद Online दर्ज कर सकेंगे।

इसके लिए 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक Self Enumeration की सुविधा उपलब्ध रहेगी। लोग अपने मोबाइल फोन या लैपटॉप के माध्यम से निर्धारित जानकारी दर्ज कर सकेंगे।

इसके बाद 1 दिसंबर से जब Census Officials घर-घर जाकर गणना करेंगे, तब Self Enumeration के दौरान प्राप्त Digital Code दिखाकर प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। इससे जनगणना की प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा और लोगों को अपनी जानकारी पहले से दर्ज कराने का विकल्प मिलेगा।

चुनाव और जनगणना के बीच तालमेल पर जोर

उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जनगणना का काम पूरा कराने की तैयारी को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनावी राज्यों में Census Work और Election Management के बीच टकराव कम करना इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

अब उत्तराखंड में सितंबर 2026 से ही कुछ पहाड़ी जिलों में जनगणना शुरू हो जाएगी, जबकि सामान्य और मैदानी क्षेत्रों में यह प्रक्रिया दिसंबर 2026 से जनवरी 2027 तक चलेगी। इसके बाद राज्य में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होने की संभावना है।