सरकार-CJP वार्ता में फंसा पेंच, सोनम वांगचुक के बदले तेवर लेकिन CJP अपनी मांगों पर कायम

NEET Paper Leak Protest और CJP Protest को लेकर सरकार और Cockroach Janata Party (CJP) के बीच बातचीत की शुरुआत तो हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। आंदोलन के बीच एक दिलचस्प स्थिति यह बनी है कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के रुख में कुछ नरमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं, जबकि CJP अपनी प्रमुख मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रही है। इसी बीच खबरें हैं कि संगठन ने सरकार की ओर से दिए गए नए बातचीत के प्रस्ताव को भी स्वीकार नहीं किया।

वांगचुक ने दिए लचीले रुख के संकेत

करीब 25 दिनों से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने संकेत दिए हैं कि यदि छात्रों से जुड़े कुछ अहम मुद्दों पर ठोस आश्वासन मिलता है तो वह केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की शर्त तक सीमित नहीं रहेंगे। इससे यह माना जा रहा है कि आंदोलन के समाधान के लिए बातचीत की गुंजाइश अभी भी बनी हुई है।

CJP अपनी मुख्य मांगों पर कायम

दूसरी ओर, Cockroach Janata Party (CJP) का रुख पहले जैसा ही बना हुआ है। संगठन का कहना है कि जब तक उसकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार की ओर से बातचीत का नया प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद CJP ने उसे स्वीकार नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट में भी उठा प्रदर्शन का मुद्दा

इसी बीच Supreme Court में भी प्रदर्शन से जुड़ा मामला सामने आया। सुनवाई के दौरान एक वकील ने अदालत के सामने प्रदर्शन से जुड़े वीडियो दिखाने की अनुमति मांगी। इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि अदालत वीडियो देखने में समय नहीं लगाएगी और मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाने में अनिच्छा जताई।

संसद मार्च के दौरान बढ़ा तनाव

CJP Protest ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च कर रहे थे। दिल्ली पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और बल प्रयोग भी किया। इस घटना के बाद कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जबकि हिंसा से जुड़े मामलों में कई FIR भी दर्ज की गईं।

विपक्ष का भी मिला समर्थन

NEET Protest को विपक्षी दलों का समर्थन भी मिल रहा है। छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ कई विपक्षी नेता भी आंदोलन के पक्ष में खुलकर सामने आए हैं। इससे सरकार पर राजनीतिक और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।

क्या निकलेगा समाधान?

फिलहाल आंदोलन ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है जहां एक तरफ बातचीत की संभावना बनी हुई है, जबकि दूसरी ओर प्रमुख मांगों को लेकर गतिरोध कायम है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली संभावित वार्ता से ही तय होगा कि यह विवाद सुलझेगा या आंदोलन और तेज होगा।