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उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही forest fire incidents के बीच राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जंगलों में आग (वनाग्नि) रोकने और बुझाने में अहम भूमिका निभाने वाले लोगों को अब सरकार की तरफ से नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
राज्य की भाजपा सरकार ने घोषणा की है कि वनाग्नि नियंत्रण में बेहतर काम करने वाले वनकर्मियों, समूहों और आम नागरिकों को ₹1 लाख तक का reward दिया जाएगा।
किसे मिलेगा कितना इनाम?
सरकार की प्रस्तावित Forest Fire Reward Scheme के तहत:
पहला पुरस्कार → ₹1 लाख
दूसरा पुरस्कार → ₹75 हजार
तीसरा पुरस्कार → ₹50 हजार
यह पुरस्कार उन लोगों को दिया जाएगा जिन्होंने वनाग्नि रोकने या आग बुझाने में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।
वन विभाग की नई रणनीति
वन मंत्री Subodh Uniyal ने बताया कि राज्य में जंगलों की आग रोकने के लिए नई रणनीतियों पर काम किया जा रहा है।
इनमें शामिल हैं:
जंगलों से गुजरने वाली water pipelines पर hydrants लगाना
आग लगने पर तुरंत पानी उपलब्ध कराना
fire response system को मजबूत बनाना
स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाना
चीड़ पिरूल संग्रह अभियान पर जोर
सरकार ने जंगलों में ज्वलनशील सामग्री कम करने के लिए Pine Needle Collection Drive (Pine Pirul Campaign) को भी तेज किया है।
लक्ष्य:
8555 टन पिरूल इकट्ठा करना
जंगलों में सूखी सामग्री कम करना
forest fire spread को नियंत्रित करना
केवल 14% Fire Alerts ही असली वनाग्नि
वन विभाग के अनुसार
Forest Survey of India (FSI) से हजारों fire alerts मिलते हैं
लेकिन जांच में केवल करीब 14% मामले वास्तविक forest fire निकलते हैं
कई alerts खेतों, कूड़े या अन्य जगह लगी आग के होते हैं
11 हजार से ज्यादा कर्मचारी तैनात
इस बार वनाग्नि सीजन में:
5,625 fire watchers
करीब 6,000 forest staff
तैनात किए गए हैं।
इसके अलावा:
कर्मचारियों का ₹10 लाख का accident insurance
fire-resistant suits और safety equipment भी उपलब्ध कराए गए हैं
कौन से जिले सबसे ज्यादा संवेदनशील?
Forest Fire Risk Mapping के अनुसार उत्तराखंड के ये जिले सबसे ज्यादा sensitive माने गए हैं:
गर्मी बढ़ने के साथ देहरादून, सेलाकुई और विकासनगर क्षेत्रों में आग की घटनाएं भी बढ़ी हैं।
पिछले 24 घंटों में:
12 fire incidents दर्ज हुए
कई जगह जंगलों और सूखी घास में आग लगी
दमकल विभाग ने समय रहते आग पर काबू पा लिया
चमोली और साहिया में भी बड़ा नुकसान
चमोली जिले के नारायणबगड़ क्षेत्र में
चीड़ के हजारों पेड़ जल गए
जंगलों में धुआं फैल गया
बिजली लाइन और वन विभाग कार्यालय के पास तक आग पहुंच गई
वहीं साहिया क्षेत्र में
आम के पेड़ और पशुओं का चारा जलकर राख हो गया
ग्रामीण देर रात तक आग बुझाने में जुटे रहे
सरकार ने लोगों से क्या अपील की?
वन मंत्री ने लोगों से अपील की कि
जंगल में आग दिखे तो तुरंत सूचना दें
वीडियो बनाने के बजाय आग बुझाने में सहयोग करें
सामुदायिक भागीदारी से ही वनाग्नि पर नियंत्रण संभव है
उत्तराखंड में बढ़ती forest fire crisis को देखते हुए सरकार अब prevention और public participation दोनों पर जोर दे रही है। इनाम योजना, fire hydrants और pine needle collection जैसी पहलें जंगलों को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।