ठाकुरबाड़ी में गूंज रहे थे ‘जय श्रीराम’ के नारे, अचानक शुभेंदु अधिकारी ने रोक दिया

पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद ऐसा कदम उठाया, जिसकी राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा हो रही है। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद शुभेंदु अधिकारी सीधे Jorasanko Thakurbari पहुंचे, जहां उन्होंने कविगुरु Rabindranath Tagore को श्रद्धांजलि दी।
इसी दौरान ठाकुरबाड़ी परिसर में मौजूद BJP कार्यकर्ता और समर्थक ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाने लगे। लेकिन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए समर्थकों को शांत कराया और साफ कहा कि यह जगह राजनीतिक या धार्मिक नारेबाजी के लिए नहीं है।

“यह कविगुरु की जगह है”

मुख्यमंत्री ने समर्थकों से कहा, “यह ‘जय श्रीराम’ कहने की जगह नहीं है। यहां सिर्फ कविगुरु का नाम लिया जाएगा। यह राजनीतिक खींचतान का समय नहीं है। मुख्यमंत्री के रूप में अब मैं सबका हूं।”
शुभेंदु अधिकारी के इस बयान को बंगाल की राजनीति में एक बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव खत्म हो चुके हैं और अब उनकी प्राथमिकता पूरे राज्य का विकास है।

टैगोर की प्रतिमा के सामने टेका माथा

Suvendu Adhikari का यह दौरा प्रतीकात्मक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है। Rabindranath Tagore की 166वीं जयंती के अवसर पर उन्होंने ठाकुरबाड़ी में टैगोर की प्रतिमा के सामने घुटनों के बल बैठकर माथा जमीन से लगाया।
उन्होंने कहा, “बंगाल और बंगाली संस्कृति को गुरुदेव के आदर्शों से दिशा मिलनी चाहिए। आज उसी नई शुरुआत का दिन है।”

बंगाल की संस्कृति और शिक्षा पर जताई चिंता

मुख्यमंत्री ने बंगाल की शिक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्य को फिर से सांस्कृतिक और शैक्षणिक रूप से मजबूत बनाने की जरूरत है और इसके लिए सभी को साथ आना होगा।

Rabindra Bharati University से रहा है खास संबंध

इस दौरे का एक निजी पहलू भी सामने आया। शुभेंदु अधिकारी Rabindra Bharati University के पूर्व छात्र रह चुके हैं। उन्होंने यहां से Environmental Studies में मास्टर डिग्री हासिल की थी।
दौरे के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय की कुलपति सोनाली चक्रवर्ती बनर्जी और अन्य अधिकारियों से मुलाकात की। इसके अलावा वे ‘बिचित्रा भवन’ भी गए, जहां उन्होंने पुराने दिनों को याद किया और विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ चाय और पारंपरिक ‘निमकी’ का आनंद लिया।

राजनीतिक संकेतों के भी निकाले जा रहे मायने

राजनीतिक विश्लेषक शुभेंदु अधिकारी के इस कदम को एक Soft Image और Inclusive Politics के संकेत के रूप में देख रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद उनका यह संदेश साफ तौर पर यह दिखाने की कोशिश माना जा रहा है कि अब उनकी राजनीति सिर्फ चुनावी नारों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक संतुलन पर भी फोकस करेगी।