Prayagraj Magh Mela: संगम जाने से रोका गया शंकराचार्य का रथ, साधु-पुलिस आमने-सामने

Prayagraj Magh Mela 2025 के दौरान मौनी अमावस्या स्नान से पहले संगम तट पर बड़ा विवाद सामने आया। ज्योतिष पीठाधीश्वर Shankaracharya Avimukteshwaranand Saraswati के रथ को पुलिस और मेला प्रशासन ने संगम जाने से पहले ही रोक दिया। इस फैसले को लेकर शंकराचार्य के समर्थक साधु-संतों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हो गई, जिससे संगम क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई।

जुलूस के साथ संगम जाने की अनुमति नहीं

मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने रथ और जुलूस के साथ Sangam Snan के लिए रवाना हुए थे। लेकिन पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन का हवाला देते हुए रथ को आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रशासन की ओर से कहा गया कि जुलूस के साथ संगम तट पर जाने की अनुमति नहीं है और केवल सीमित संख्या में लोगों के साथ स्नान किया जा सकता है।

इस पर शंकराचार्य ने आपत्ति जताते हुए पुलिस और मेला प्रशासन पर arbitrary action और तानाशाही रवैये का आरोप लगाया।

पुलिस और साधुओं में झड़प, बढ़ाई गई सुरक्षा

पुलिस से विवाद की सूचना वायरलेस पर प्रसारित होते ही बड़ी संख्या में अधिकारी और सुरक्षा बल मौके पर पहुंच गए। Divisional Commissioner, Police Commissioner और Mela Adhikari सहित वरिष्ठ अधिकारी संगम तट पर पहुंचे। पूरे इलाके को देखते ही देखते high security zone में बदल दिया गया।

पुलिस ने शंकराचार्य को रथ से उतरने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद वे संगम से पहले ही अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए।

20 से अधिक साधु हिरासत में

झड़प के बाद पुलिस ने 20 से अधिक साधु-संतों को हिरासत में ले लिया। हालांकि संगम घाटों पर स्नान की प्रक्रिया जारी रही, लेकिन शंकराचार्य समर्थकों के प्रदर्शन के कारण माहौल तनावपूर्ण बना रहा।

बैरिकेडिंग तोड़ने का आरोप, पांटून पुल पर बवाल

रथ रोके जाने से नाराज़ शंकराचार्य के समर्थकों ने संगम की ओर कूच करने की कोशिश की। इस दौरान Pontoon Bridge No. 4 के पास बैरिकेडिंग तोड़ने और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया।

संगम तट पर तनाव बरकरार

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के संगम स्नान को लेकर बने गतिरोध के कारण Prayagraj Sangam Area में तनाव बना हुआ है। पुलिस प्रशासन शंकराचार्य और उनके समर्थकों को समझाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ने से हालात संवेदनशील बने हुए हैं।