Varanasi Astrology News: 72 साल में बदलती है मकर संक्रांति की तारीख, समझिए कारण

Makar Sankranti Date Change को लेकर एक अहम ज्योतिषीय जानकारी सामने आई है। ग्रहों के राजा Sun Transit (Surya Gochar) के अनुसार सूर्य 15 जनवरी को धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष गणनाओं के मुताबिक अब वर्ष 2080 तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाती रहेगी। इसके बाद सूर्य का राशि परिवर्तन एक दिन आगे खिसक जाएगा और मकर संक्रांति 16 January को मनाई जाने लगेगी।

इस वर्ष सूर्य का मकर राशि में प्रवेश रात्रि 9:38 बजे होगा। इसके साथ ही Kharmas End हो जाएगा और विवाह, गृह प्रवेश जैसे सभी auspicious works (मांगलिक कार्य) दोबारा शुरू हो जाएंगे।

विशेष योग में मकर संक्रांति

इस बार मकर संक्रांति Shukla Paksha Dwadashi Tithi, Jyeshtha Nakshatra और Guruvar (Thursday) के संयोग में मनाई जाएगी। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार Uttarayan Period को देवताओं का दिन और Dakshinayan को देवताओं की रात कहा जाता है।

ज्योतिषाचार्य Daivagya Krishna Shastri के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन किसी भी नदी में किया गया स्नान Ganga Snan के समान पुण्य प्रदान करता है। यही कारण है कि इस पर्व को holy bathing festival के रूप में भी जाना जाता है।

72 वर्षों में क्यों बदलती है मकर संक्रांति की तारीख?

ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार हर वर्ष सूर्य के राशि परिवर्तन में लगभग 20 मिनट की देरी होती है।

तीन वर्षों में यह अंतर करीब 1 घंटा हो जाता है

और 72 वर्षों में 24 घंटे का अंतर बन जाता है

चूंकि सूर्य और चंद्रमा progressive planets हैं, ये पीछे नहीं चलते। इसी वजह से समय का यह अंतर जुड़ता जाता है और मकर संक्रांति की तारीख एक दिन आगे बढ़ जाती है।

इतिहास पर नजर डालें तो

1936 से मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाती थी

1864 से 1936 तक 13 जनवरी

और 1792 से 1864 तक 12 जनवरी को यह पर्व मनाया जाता था

मकर संक्रांति पर इन बातों से करें परहेज

शास्त्रों में Makar Sankranti rituals के साथ कुछ नियम भी बताए गए हैं, जिनका पालन करना शुभ माना जाता है:

नशे और नकारात्मक आदतों से दूरी बनाए रखें

Tamasic food का सेवन न करें

किसी का अपमान या अपशब्द न कहें

पेड़ों की कटाई से बचें और Tulsi leaves न तोड़ें

इन नियमों का पालन करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।