“12 संगठनों ने छोड़ा Hurriyat का साथ, क्या खत्म हो गया अलगाववाद?”

जम्मू-कश्मीर में Hurriyat के कमजोर पड़ने की कहानी: बदलाव की बयार या नई शुरुआत?

कभी कश्मीर में अलगाववाद (Separatism in Kashmir) का सबसे मजबूत चेहरा माने जाने वाला संगठन Hurriyat Conference, आज खुद अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है।
बीते कुछ महीनों में 12 प्रमुख संगठनों ने इस गठबंधन से अलग होकर Indian Constitution, National Integrity और Peace Process के प्रति अपनी निष्ठा जताई है।

इस घटनाक्रम को केवल संगठनात्मक परिवर्तन मानना भूल होगी। यह Kashmir Valley में सामाजिक और राजनीतिक सोच में आए गहरे बदलाव का संकेत है।

Hurriyat से अलग हुए संगठन: कौन-कौन और क्यों?

12 संगठनों की सूची जो Hurriyat से अलग हो चुके हैं:

  1. Jammu & Kashmir Islamic Political Party

  2. Jammu & Kashmir Muslim Democratic League

  3. Kashmir Freedom Front

  4. J&K Peoples Movement

  5. Democratic Political Movement

  6. J&K Tahreek-e-Isteqlal

  7. J&K Tehreek-e-Istikamat

  8. Jammu & Kashmir Mass Movement (JKMM)

  9. J&K Liberation Political Front

  10. United Peace Movement

  11. Kashmir Political Unity Council

  12. Kashmir Civil Society Forum

इन संगठनों में से अधिकांश ने पहले Hurriyat के hardline गुट जैसे कि Syed Ali Shah Geelani faction से जुड़ाव रखा था। लेकिन अब इन्होंने न केवल Hurriyat से नाता तोड़ा है, बल्कि यह भी स्पष्ट किया है कि वे anti-India narrative से भी खुद को अलग कर रहे हैं।

JKMM की चेयरपर्सन Farida Behenji का बयान:

“हम अब किसी भी ऐसे विचारधारा का हिस्सा नहीं बनना चाहते जो देश की एकता और अखंडता के खिलाफ हो। Kashmir के लोगों की aspirations को अब Mainstream Democratic Process के जरिए पूरा किया जाना चाहिए।”

Hurriyat Conference: Origin, Ideology और Decline

स्थापना और उद्देश्य

All Parties Hurriyat Conference (APHC) की स्थापना 9 मार्च 1993 को हुई थी। इसका उद्देश्य था –

  • अलगाववादी विचारधारा को राजनीतिक मंच देना

  • कश्मीर विवाद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाना

  • भारत, पाकिस्तान और कश्मीरी जनता के बीच त्रिपक्षीय संवाद की वकालत

Key Leaders:

  • Mirwaiz Umar Farooq (Moderate faction)

  • Syed Ali Shah Geelani (Hardliner)

  • Abdul Gani Lone (Later assassinated in 2002)

शुरुआत में Hurriyat ने कश्मीर में strikes, shutdowns, और protests के ज़रिए ज़मीनी पकड़ बनाई। यह लोगों की grievances और aspirations की बात करता नजर आया। लेकिन समय के साथ यह संगठन terror funding, ISI backing, और Pakistan’s proxy agenda से जुड़ता गया।

Hurriyat के पतन के 5 मुख्य कारण

1. Article 370 Abrogation (2019)

Center Government ने Jammu & Kashmir को विशेष दर्जा देने वाला Article 370 हटा दिया और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांट दिया। इससे Hurriyat का Political Base और Separatist Narrative दोनों कमजोर हो गया।

2. Zero Tolerance Against Terrorism Policy

NIA और ED ने कई नेताओं पर terror funding, hawala networks, और foreign assets को लेकर केस दर्ज किए। Hurriyat के ऑफिस, संपत्तियां और बैंक अकाउंट सील किए गए।

3. Leadership Vacuum

  • Syed Ali Shah Geelani के निधन के बाद कट्टर रुख रखने वाला कोई नेता नहीं बचा।

  • Mirwaiz Umar Farooq कई सालों से house arrest में हैं।
    संगठन नेतृत्वविहीन हो गया।

4. Kashmiri Youth की बदली सोच

आज का युवा career, education, और development चाहता है।
Mainstream Politics को ज्यादा पसंद किया जा रहा है।

5. Loss of Public Support

अधिकांश कश्मीरी अब हिंसा और अस्थिरता से थक चुके हैं।
Local Support base तेजी से गिर रहा है।

Center Government की सख्त नीति और असर

Home Minister Amit Shah ने इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए लिखा –

“Hurriyat से जुड़े 12 संगठनों ने भारत की एकता को चुना है। ये ‘One India, Great India’ की ओर बढ़ता कदम है।”

Key Strategic Moves by Government:

  • Hurriyat leaders की properties को Attach करना

  • Terror Nexus पर शिकंजा कसना

  • Pakistan-backed elements को एक्सपोज़ करना

  • Development Projects (AIIMS, IITs, Industrial Towns) पर फोकस करना

  • Youth Engagement Initiatives बढ़ाना

Ground Reality: क्या ये बदलाव स्थायी है?

Kashmir में हो रहे ये परिवर्तन केवल राजनीतिक रणनीति भर नहीं हैं, बल्कि grassroots level पर एक मानसिक बदलाव (psychological shift) की ओर इशारा करते हैं।
आज Kashmir में:

  • Schools खुले रहते हैं

  • Internet shutdowns कम हुए हैं

  • Startups और youth engagement बढ़ा है

  • Women participation भी mainstream politics में दिखाई दे रही है

Hurriyat से विदाई, भारत की ओर नई शुरुआत

Hurriyat से 12 संगठनों का अलग होना सिर्फ एक गठबंधन का पतन नहीं, बल्कि Kashmir में New Narrative Formation की शुरुआत है।

यह स्थिति दर्शाती है कि अब लोग:

  • Dialogue over violence चाहते हैं

  • Development over destruction को चुन रहे हैं

  • Constitutional rights और democracy को अपनाने के पक्ष में हैं

Kashmir में अगर यही सोच बनी रहती है तो यह ना सिर्फ भारत के लिए, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में Peace, Stability and Growth का आधार बन सकता है।