Why did Ashok Khemka support the Modi government? The Delhi Gymkhana Club controversy heated up.
हरियाणा के पूर्व IAS अधिकारी Ashok Khemka ने Delhi Gymkhana Club विवाद में केंद्र सरकार के फैसले का खुलकर समर्थन किया है। अपने बेबाक बयानों और प्रशासनिक फैसलों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले खेमका ने कहा कि क्लब की लीज समाप्त करने का फैसला सरकार का “साहसिक कदम” है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि राजधानी दिल्ली में मौजूद यह क्लब बेहद कीमती सार्वजनिक जमीन पर बना हुआ है, जिसकी कीमत लगभग 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा सकती है। ऐसे में सरकार का कदम Public Property और Public Resources के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए।
‘जमे-जमाए अमीर लोग करेंगे विरोध’
अशोक खेमका ने कहा कि इस फैसले का विरोध होना स्वाभाविक है, क्योंकि लंबे समय से प्रभावशाली और संपन्न वर्ग इस क्लब से जुड़े रहे हैं।
उन्होंने लिखा कि “जमे-जमाए अमीर लोग इसका विरोध करेंगे”, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या मोदी सरकार अपने फैसले पर मजबूती से कायम रहती है या फिर दबाव में आकर पीछे हट जाती है।
उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोगों ने सरकारी जमीन के उपयोग और Elite Clubs को मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल उठाए, जबकि कई लोगों ने Delhi Gymkhana Club की ऐतिहासिक और सामाजिक पहचान का हवाला देते हुए सरकार के फैसले की आलोचना भी की।
Kiran Bedi ने किया फैसले का विरोध
देश की पहली महिला IPS अधिकारी Kiran Bedi पहले ही इस फैसले का विरोध जता चुकी हैं।
उन्होंने X पर पोस्ट कर कहा था कि दिल्ली जिमखाना क्लब की लीज खत्म करने का प्रस्ताव “बहुत दुखद” है और सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।
हालांकि केंद्र सरकार का तर्क है कि Public Land का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से और जनहित के अनुरूप होना चाहिए।
क्यों चर्चा में है Delhi Gymkhana Club?
Delhi Gymkhana Club देश के सबसे प्रतिष्ठित और पुराने क्लबों में गिना जाता है। यह क्लब राजधानी दिल्ली के प्राइम इलाके में स्थित है और लंबे समय से नौकरशाहों, पूर्व सैन्य अधिकारियों, राजनेताओं और उद्योगपतियों का प्रमुख सामाजिक केंद्र माना जाता रहा है।
अब सरकार द्वारा इसकी लीज समाप्त करने और संचालन व्यवस्था में बदलाव की कोशिश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
57 ट्रांसफर झेल चुके हैं Ashok Khemka
1991 बैच के IAS अधिकारी रहे अशोक खेमका अपने प्रशासनिक करियर के दौरान कई बड़े फैसलों को लेकर चर्चा में रहे।
34 साल की सेवा में उन्हें 57 बार ट्रांसफर झेलने पड़े। वह सबसे ज्यादा तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने 2012 में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी Sky Light Hospitality और DLF के बीच हुई गुरुग्राम जमीन डील के म्यूटेशन को रद्द कर दिया था।
2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी इस Land Deal का मुद्दा चुनावी सभाओं में उठाया था।
खेमका हरियाणा परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पद से रिटायर हुए थे।