उत्तराखंड के जंगल क्यों जल रहे हैं? हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट, 10 दिसंबर को अगली सुनवाई

उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही Forest Fire Incidents को देखते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर Suo Moto संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा है कि अब तक जंगलों में लग रही भीषण आग को रोकने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए।

इस मामले में पर्यावरणविद् प्रोफेसर अजय रावत को अदालत में उपस्थित होकर वनाग्नि रोकथाम के उपायों पर मार्गदर्शन देना था। हालांकि, तकनीकी कारणों से वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ नहीं सके और उन्होंने अदालत से सुनवाई की नई तारीख देने का अनुरोध किया।

न्यायमूर्ति उपाध्याय की टिप्पणी के बाद अदालत ने अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2025 के लिए निर्धारित कर दी, जिसमें प्रोफेसर रावत स्वयं उपस्थित होकर अपने सुझाव पेश करेंगे।

Court Observation: कागजों में Action Plan, जमीन पर Zero Result

सुनवाई के दौरान न्यायमित्र (Amicus Curiae) ने अदालत को बताया कि अदालत द्वारा 2021 से लगातार Uttarakhand Government को निर्देश जारी किए जा रहे हैं कि राज्य जंगलों में आग रोकने के लिए एक ठोस और प्रभावी योजना लागू करे।

लेकिन अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि अब तक

न कोई प्रभावी Forest Fire Management System लागू हुआ

न Monitoring

न Ground-Level Training

न Fire Line Management

हुआ है।

अदालत ने टिप्पणी की:

“यदि सरकार ने हमारे आदेशों का सही पालन किया होता, तो पिछले तीन वर्ष में वनाग्नि मामलों में कमी आनी चाहिए थी, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि स्थिति और अधिक गंभीर होती जा रही है।”

Uttarakhand में Fire Season अब खतरे की घंटी

अदालत को बताया गया कि आग के मौसम में राज्य के वन क्षेत्र (Forest Zones) तेजी से आग की चपेट में आते हैं, जिससे:

जैव विविधता नष्ट हो रही है

वन्यजीवों का Habitat प्रभावित हो रहा है

पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है

कार्बन उत्सर्जन बढ़ रहा है

विशेषज्ञों के अनुसार Uttarakhand जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील राज्य में बार-बार लगने वाली आग Climate Change का खतरा और बढ़ा देती है।

क्या होगा 10 दिसंबर की सुनवाई में?

अगली सुनवाई में अदालत:

विशेषज्ञों की रिपोर्ट सुनेगी

राज्य सरकार की तैयारी पर सवाल करेगी

एक लंबी-अवधि वाली Fire Prevention Strategy बनाने पर चर्चा कर सकती है

इस hearing को उत्तराखंड में Forest Conservation और Environmental Policy के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।