Uttarakhand Viral Letter: “चावल मंदिर में डालो, देवता न्याय करेंगे” – इंजीनियर का आदेश वायरल, मचा हड़कंप

उत्तराखंड के लोहाघाट से एक अविश्वसनीय लेकिन सच घटना सामने आई है, जिसने सरकारी कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोक निर्माण विभाग (PWD) के एक इंजीनियर ने जब विभागीय रिकॉर्ड न मिलने पर “दैवीय न्याय” की अपील की, तो सोशल मीडिया पर हलचल मच गई।

क्या है मामला?

एनएच खंड लोहाघाट के अधिशासी अभियंता आशुतोष कुमार का एक आदेश तेजी से वायरल हो गया है।
इस आदेश में उन्होंने कहा कि:

सहायक अभियंता जयप्रकाश की सेवा पुस्तिका (Service Book) कार्यालय से गायब हो गई है। इसे लेकर वे मानसिक तनाव में हैं। अतः सभी अधिकारी एवं कर्मचारी अपने घर से दो मुट्ठी चावल लाएं और किसी मंदिर में डालें, ताकि देवता न्याय करें।”

आदेश का असर: सोशल मीडिया पर वायरल, विभाग में हड़कंप

यह आदेश जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, लोगों ने सवाल उठाए कि क्या सरकारी काम अब अंधविश्वास से चलेगा?

लोनिवि विभागाध्यक्ष राजेश चंद्र शर्मा ने इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए अधिशासी अभियंता से तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।

विभागीय प्रतिक्रिया: कर्मचारी आचरण नियमों का उल्लंघन

राज्य सरकार के अनुसार:

  • आदेश में सरकारी कार्यशैली का मजाक उड़ाया गया है।

  • यह कर्मचारी आचरण नियमावली (Conduct Rules) का सीधा उल्लंघन है।

  • “दैवीय आस्था के नाम पर” इस तरह का कार्य **न तो स्वीकार्य है और न ही औपचारिक रूप से वैध।”

अब सवाल यह है:

  • क्या सरकारी दफ्तरों में अंधविश्वास की जगह है?

  • क्या इस तरह की सोच प्रशासनिक जिम्मेदारी को कमजोर नहीं करती?

  • क्या ऐसे आदेश अधिकारियों की मानसिकता और कामकाज की शैली पर सवाल नहीं उठाते?

सोशल मीडिया रिएक्शन: Memes और व्यंग्य की बाढ़

ऑर्डर के वायरल होते ही ट्विटर, फेसबुक और व्हाट्सएप पर इसे लेकर मीम्स और मज़ाकिया कमेंट्स की बाढ़ आ गई:

  • किसी ने लिखा, अब RTI से पहले मंदिर में प्रसाद चढ़ाइए!”

  • तो किसी ने कहा, ये है Digital India का नया Manual Backup सिस्टम!”

यह मामला केवल एक मजाकिया या विचित्र आदेश भर नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक सोच और सरकारी कामकाज की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है। यदि सरकारी अफसर खुद दैवीय हस्तक्षेप की अपील करने लगें, तो जनता का भरोसा प्रणालीगत न्याय में कैसे बना रहेगा?