साइबर अपराधियों पर उत्तराखंड एसटीएफ का ‘प्रहार’, देशभर में 337 शातिर ठगों की तलाश शुरू

देहरादून/   उत्तराखंड में बढ़ते साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए एसटीएफ ने एक बड़े अभियान ‘ऑपरेशन प्रहार’ की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत देशभर में छिपे 337 साइबर अपराधियों को चिन्हित किया गया है, जिन पर उत्तराखंड के विभिन्न थानों में 200 से ज्यादा मामले दर्ज हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद एसटीएफ ने इस विशेष अभियान को अंजाम देने के लिए 30 अधिकारियों और कर्मचारियों की एक टीम गठित की है, जो दो चरणों में देश के विभिन्न राज्यों में जाकर इन शातिर ठगों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।

देश के कोने-कोने में फैले हैं साइबर अपराधी

एसटीएफ के अनुसार, ये आरोपी दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल समेत देश के लगभग 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं। इनमें से कई अपराधी लंबे समय से उत्तराखंड में साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम देकर फरार चल रहे हैं, जबकि कुछ नए संदिग्धों की भी पहचान की गई है।

दर्जनों राज्यों में तैनात होंगी टीमें

एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर ने जानकारी दी कि इस अभियान के तहत पहले चरण में 17 राज्यों के 272 संदिग्ध साइबर अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ सत्यापन और कार्रवाई की जा रही है। वहीं, दूसरे चरण में 12 राज्यों के 65 आरोपियों को चिह्नित किया गया है।

कार्रवाई की निगरानी एसपी एसटीएफ स्वप्न किशोर सिंह और सीओ साइबर क्राइम अंकुश के नेतृत्व में की जा रही है। टीमें जल्दी ही संबंधित राज्यों में जाकर गिरफ्तारी और नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू करेंगी।

उत्तराखंड के दो साइबर थानों में लंबित हैं 200 से ज्यादा केस

अभियान की पृष्ठभूमि में गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र के साइबर क्राइम थानों में दर्ज सैकड़ों मामले हैं, जिनमें इन अपराधियों की संलिप्तता सामने आई है। इन मामलों में पीड़ितों को ठगी, फर्जी कॉल, ऑनलाइन फ्रॉड और बैंकिंग धोखाधड़ी जैसे मामलों में नुकसान उठाना पड़ा है।

देशव्यापी स्तर पर पहली बार इस तरह की कार्रवाई

एसटीएफ का ‘ऑपरेशन प्रहार’ देश में साइबर अपराधियों के खिलाफ शुरू किया गया पहला इतना व्यापक और समन्वित अभियान माना जा रहा है। इसका उद्देश्य सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना है।


यह अभियान न केवल अपराधियों पर शिकंजा कसने का एक ठोस प्रयास है, बल्कि आम जनता को यह विश्वास भी दिलाता है कि राज्य सरकार और पुलिस साइबर सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सजग और सक्रिय है।