Twisha Sharma Dowry Death Case: MP High Court gives major decision, cancels anticipatory bail
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में सामने आए Twisha Sharma Dowry Death Case में एक बड़ा कानूनी अपडेट आया है। MP High Court ने इस मामले में आरोपी सास Giribala Singh को दी गई anticipatory bail को रद्द कर दिया है।
यह मामला 33 वर्षीय मॉडल और एक्ट्रेस Twisha Sharma death case से जुड़ा है, जिनकी शादी के छह महीने के भीतर 12 मई को अपने पति के घर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उनका शव फांसी के फंदे पर लटका मिला था।
केस की पृष्ठभूमि (Case Background)
परिजनों के अनुसार:
Twisha Sharma पर ससुराल में dowry harassment किया जा रहा था
पति और सास दोनों पर mental cruelty के आरोप लगाए गए
शादी के कुछ ही महीनों बाद उनकी मौत हो गई
इस घटना ने dowry death laws और domestic violence cases पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
High Court का फैसला
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने Trial Court द्वारा दी गई anticipatory bail को रद्द करते हुए कहा कि:
मामले में स्पष्ट आरोप मौजूद हैं
WhatsApp chats में भी harassment के संकेत मिलते हैं
ट्रायल कोर्ट ने सभी सबूतों पर ठीक से विचार नहीं किया
कोर्ट ने कहा कि केवल पति के खिलाफ नहीं, बल्कि सास Giribala Singh के खिलाफ भी ठोस आरोप मौजूद हैं।
WhatsApp Chats और Evidence का महत्व
कोर्ट ने जांच के दौरान पाया कि:
डिजिटल evidence (WhatsApp chats) में harassment के संकेत हैं
मृतका को मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने की बात सामने आई
pregnancy abortion pressure जैसे गंभीर आरोप भी रिकॉर्ड में हैं
यह डिजिटल evidence इस केस में एक अहम role निभा रहा है।
Postmortem और मेडिकल रिपोर्ट
कोर्ट ने case diary के आधार पर यह भी नोट किया कि:
मौत “antemortem hanging” यानी मृत्यु से पहले फांसी के संकेत मिले
शरीर पर 6 अन्य चोटों के निशान भी पाए गए
मेडिकल रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि चोटें बाद की प्रक्रिया से नहीं हुईं
Dowry Prohibition Act के तहत मामला
यह केस निम्न धाराओं के तहत दर्ज है:
BNS 2023 की कई गंभीर धाराएं
Dowry Prohibition Act, 1961 की Section 3 और 4
domestic cruelty और dowry harassment के आरोप
कोर्ट का अंतिम आदेश
High Court ने साफ कहा:
ट्रायल कोर्ट का bail order गलत था
साक्ष्यों को सही तरीके से नहीं देखा गया
इसलिए Giribala Singh को दी गई anticipatory bail रद्द की जाती है
Case Title और Legal Proceedings
Case Title: State v. Giribala Singh
MCRC: 24475 of 2026
अन्य संबंधित याचिका: MCRC 24405 of 2026
Twisha Sharma Dowry Death Case एक बार फिर यह दिखाता है कि भारत में dowry harassment और domestic violence cases में digital evidence, WhatsApp chats और medical reports कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
MP High Court का यह फैसला यह संकेत देता है कि ऐसे मामलों में anticipatory bail केवल आरोपों की गंभीरता और सबूतों की जांच के बाद ही दी जाएगी।