Twisha Sharma Death Case: Where did the belt go missing for two days? A major revelation in the CBI investigation
ट्विशा शर्मा मौत मामले में एक अहम सवाल शुरुआत से ही चर्चा में रहा है—आखिर फंदे में इस्तेमाल की गई बेल्ट घटना के बाद दो दिनों तक कहां थी? अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच में इस रहस्य से जुड़ा महत्वपूर्ण खुलासा सामने आया है, जिसने मामले को नया मोड़ दे दिया है।
बेल्ट को लेकर उठ रहे थे गंभीर सवाल
ट्विशा शर्मा के परिजन लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि मामले में सबूतों से छेड़छाड़ की गई है। सबसे बड़ा सवाल उस बेल्ट को लेकर था, जिसके सहारे ट्विशा फंदे पर लटकी मिली थीं।
परिवार का कहना था कि यदि मामला आत्महत्या का था, तो फंदे में इस्तेमाल हुई बेल्ट को सुरक्षित रखकर तुरंत जांच प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाना चाहिए था।
CBI जांच में क्या हुआ खुलासा?
जांच में सामने आया है कि बरामद बेल्ट को घटना के तुरंत बाद फोरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा गया था।
सूत्रों के अनुसार, मामले के जांच अधिकारी उप निरीक्षक दिनेश शर्मा ने बेल्ट को करीब दो दिन तक अपने वाहन में रखा। इसके बाद उसे फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) भेजा गया।
यही तथ्य अब जांच एजेंसियों के लिए नए सवाल खड़े कर रहा है कि आखिर महत्वपूर्ण सबूत को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तत्काल सुरक्षित क्यों नहीं किया गया।
पूर्व जज सास और पति न्यायिक हिरासत में
मामले के मुख्य आरोपी माने जा रहे पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
इससे पहले दोनों से पूछताछ की गई थी, जिसमें बेल्ट और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को लेकर भी सवाल पूछे गए।
जांच अधिकारी से हो सकती है पूछताछ
सूत्रों के मुताबिक CBI अब उस समय के जांच अधिकारी उप निरीक्षक दिनेश शर्मा से भी पूछताछ कर सकती है।
बताया जा रहा है कि:
उन्हें नोटिस जारी करने की तैयारी है।
मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
सबूतों के संरक्षण (Evidence Preservation) की प्रक्रिया की भी जांच की जाएगी।
परिवार ने शुरू से जताई हत्या की आशंका
ट्विशा शर्मा के परिजनों ने शुरुआत से ही मौत को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई है।
उनका कहना है कि बेल्ट के संरक्षण में हुई कथित लापरवाही कई सवाल खड़े करती है और इस पहलू की गहराई से जांच होनी चाहिए।
कोर्ट में भी हुआ विवाद
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) अदालत में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह ने आरोप लगाया कि ट्विशा पक्ष के अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने न्यायालय परिसर में उनके बेटे समर्थ के साथ मारपीट की थी।
हालांकि अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कोर्ट परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज की जांच कराई जा सकती है।
जांच का केंद्र बनी बेल्ट
फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल मामले में फंदे में इस्तेमाल हुई बेल्ट जांच का अहम केंद्र बन गई है। CBI अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सबूतों को संभालने की प्रक्रिया में कहीं कोई चूक या लापरवाही तो नहीं हुई।
आने वाले दिनों में जांच अधिकारी और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ के बाद इस मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।