The NDA needs the support of 360 MPs; why could the 22 DMK MPs prove to be game-changers?
Lok Sabha Delimitation Bill: संसद में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। केंद्र सरकार मौजूदा Monsoon Session में इस तरह के संविधान संशोधन विधेयक को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसी बीच तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी DMK के रुख में बदलाव के संकेतों ने लोकसभा के राजनीतिक गणित को दिलचस्प बना दिया है।
लोकसभा में किसी संविधान संशोधन विधेयक को दो-तिहाई बहुमत से पारित कराने के लिए 360 सांसदों का समर्थन जरूरी माना जा रहा है। फिलहाल NDA के पास करीब 326 सांसदों का आंकड़ा बताया जा रहा है। ऐसे में सरकार को बहुमत के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। इसी वजह से लोकसभा में DMK के 22 MPs की भूमिका अहम मानी जा रही है।
Delimitation Bill पर DMK के बदले सुर
तमिलनाडु में राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के बीच DMK अब परिसीमन विधेयक को लेकर पहले की तरह सीधा विरोध नहीं कर रही है। पार्टी का कहना है कि विधेयक के वास्तविक प्रावधान सामने आने के बाद ही वह यह तय करेगी कि उसका समर्थन करना है या विरोध।
DMK के वरिष्ठ नेता तिरुचि शिवा ने भी संकेत दिया कि पार्टी का मौजूदा रुख पहले से अलग है। उनका कहना है कि पहले विधेयक का Draft सामने आना चाहिए और उसके प्रावधानों को देखने के बाद ही अंतिम फैसला किया जाएगा।
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, यदि प्रस्तावित Bill में राज्यों की मौजूदा विधानसभा सीटों में समान रूप से करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान किया जाता है, तो DMK इसके समर्थन पर विचार कर सकती है।
DMK के 22 सांसद क्यों हैं महत्वपूर्ण?
लोकसभा में DMK के 22 सांसद हैं। NDA के पास मौजूदा संख्या को देखते हुए यदि सरकार को 360 का आंकड़ा पार करना है, तो विपक्षी दलों या अन्य सहयोगियों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
ऐसे में DMK का रुख Game Changer साबित हो सकता है। हालांकि, अभी पार्टी ने विधेयक को समर्थन देने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
DMK के रुख में बदलाव को तमिलनाडु की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी पहले इस मुद्दे को राज्य के हितों से जोड़ते हुए विधेयक का मुखर विरोध कर चुकी है।
पहले क्यों कर रही थी DMK विरोध?
पिछले सत्र में जब सरकार ने परिसीमन से संबंधित प्रस्ताव आगे बढ़ाया था, तब DMK ने इसका खुलकर विरोध किया था। पार्टी का तर्क था कि प्रस्तावित व्यवस्था तमिलनाडु जैसे राज्यों के हितों के खिलाफ जा सकती है।
उस समय Delimitation Issue को लेकर विपक्षी INDIA Alliance में भी विरोध की रणनीति पर सहमति बनी थी। DMK ने केंद्र सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।
अब पार्टी का कहना है कि वह Bill के अंतिम प्रावधान सामने आने के बाद अपना फैसला करेगी। इस बदलाव ने सरकार के लिए संभावित समर्थन को लेकर नई राजनीतिक चर्चा शुरू कर दी है।
NDA के सामने 360 का आंकड़ा
लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों का समर्थन जरूरी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार NDA के पास करीब 326 सांसद हैं। इसका मतलब है कि सरकार को लगभग 34 अतिरिक्त सांसदों के समर्थन की जरूरत हो सकती है।
यही वजह है कि DMK के 22 सांसदों का रुख महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि, केवल DMK के समर्थन से ही NDA 360 के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाएगा। सरकार को अन्य दलों और सांसदों के समर्थन की भी आवश्यकता होगी।
इस बीच, कांग्रेस के टीवीके सरकार को समर्थन देने के मुद्दे पर नाराजगी के बाद DMK के INDIA Alliance से अलग होने की खबरों ने भी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित किया है। ऐसे में केंद्र के लिए DMK के संभावित रुख पर नजर रखना स्वाभाविक है।
क्या परिसीमन और महिला आरक्षण पर होगा बड़ा बदलाव?
सरकार जिस प्रस्तावित Constitution Amendment Bill को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है, उसका उद्देश्य 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा बताया जा रहा है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 किए जाने की चर्चा है। हालांकि, इसको लेकर अंतिम प्रावधान और सरकार की औपचारिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
परिसीमन का मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण का असर राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है। यही वजह है कि दक्षिण भारतीय राज्य विशेष रूप से इसके संभावित प्रभाव को लेकर सावधानी बरत रहे हैं।
Special Parliament Session पर सरकार ने क्या कहा?
परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों के बीच संसद का Special Session बुलाए जाने की चर्चा भी सामने आई थी। कुछ राजनीतिक हलकों में दावा किया जा रहा था कि स्वतंत्रता दिवस के बाद 16 से 18 अगस्त के बीच विशेष सत्र बुलाया जा सकता है।
हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार रात इन चर्चाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि 16 से 18 अगस्त के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।
इसका मतलब है कि सरकार मौजूदा Monsoon Session के दौरान ही संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकती है।
Delimitation Bill पर आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक का अंतिम Draft क्या होगा और DMK उस पर क्या रुख अपनाएगी।
NDA के पास करीब 326 सांसद होने की स्थिति में 360 का आंकड़ा हासिल करना आसान नहीं होगा। ऐसे में DMK के 22 सांसदों के साथ-साथ अन्य विपक्षी या गैर-NDA दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
हालांकि, जब तक Bill के अंतिम प्रावधान और विभिन्न राजनीतिक दलों का आधिकारिक रुख सामने नहीं आता, तब तक समर्थन का पूरा राजनीतिक गणित स्पष्ट नहीं होगा। फिलहाल Delimitation Bill, Women Reservation और Lok Sabha Seat Expansion को लेकर दिल्ली से लेकर तमिलनाडु तक सियासी हलचल तेज है।