Swami Gyananand Maharaj Interview: Why is the Gita important for young people in the mobile age?
Uttarakhand News के तहत अमर उजाला से विशेष बातचीत में Gita Manishi Swami Gyananand Maharaj ने कहा कि Bhagavad Gita केवल हिंदुओं की आस्था का ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह एक Universal Life Philosophy है। उन्होंने कहा, “जो भी गीता को पढ़ता है, उसे लगता है कि यह ग्रंथ मेरे लिए लिखा गया है।”
स्वामी ज्ञानानंद महाराज के अनुसार, गीता में जीवन की चुनौतियों से जूझने और उन्हें अवसर में बदलने की शक्ति है। महाभारत काल में अर्जुन जिस तरह भ्रम और दुविधा में थे, आज का युवा भी उसी तरह stress, anxiety और confusion से गुजर रहा है।
आज का महाभारत है जीवन का संघर्ष
स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि आज का समय सुविधाओं से भरा जरूर है, लेकिन इसके साथ mental pressure और चिंता भी कई गुना बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि modern lifestyle में बढ़ती परेशानियों के बीच भगवत गीता युवाओं को positive thinking और creative energy देती है।
उनका मानना है कि गीता मुख्य रूप से युवाओं के लिए ही है, क्योंकि युवाओं के भीतर अपार ऊर्जा है, लेकिन वे अपनी क्षमता को पहचान नहीं पाते।
Mobile और Internet की उलझन से बाहर निकलने का मार्ग
आज का युवा mobile addiction और internet distraction में उलझा हुआ है। इस पर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता सिखाती है कि जब तक व्यक्ति अपने भीतर better self बनने की जिज्ञासा नहीं जगाता, तब तक वह भ्रम में ही भटकता रहता है।
उन्होंने कहा कि Bhagavad Gita पढ़ते-पढ़ते व्यक्ति की क्षमता स्वतः बढ़ने लगती है, जिससे जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
रिश्तों में आत्मीयता लौटाने का ग्रंथ है गीता
स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने रिश्तों पर भी गीता के दृष्टिकोण को साझा किया। उन्होंने कहा कि आज रिश्तों में पहले जैसी emotional bonding नहीं रही। जब तक हम दूसरों की भावनाओं का सम्मान नहीं करेंगे, तब तक रिश्ते मजबूत नहीं हो सकते।
उनके अनुसार, “अगर प्रेम चाहते हो तो प्रेम बांटना भी पड़ेगा।” गीता पारस्परिक प्रेम और समझ बढ़ाकर रिश्तों को मजबूत करने की सीख देती है।
तुम स्वयं अपने मित्र हो, स्वयं ही शत्रु
स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि Bhagavad Gita के हर श्लोक में जीवन का गहरा संदेश छिपा है। गीता सिखाती है कि व्यक्ति स्वयं ही अपना मित्र और स्वयं ही अपना शत्रु होता है।
बुरी आदतों में उलझकर इंसान खुद को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए जरूरी है कि व्यक्ति self-awareness के जरिए स्वयं को जाग्रत करे। उन्होंने कहा कि जीवन चुनौतियों का नाम है और जब तक चुनौतियां नहीं होंगी, तब तक आगे बढ़ने की दृढ़ता भी नहीं आएगी।
गीता संन्यासियों तक सीमित नहीं
स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने उस भ्रांति को भी खारिज किया कि गीता सिर्फ संन्यासियों या मंदिरों तक सीमित है। उन्होंने कहा कि Bhagavad Gita हर क्षेत्र के लिए उपयोगी है—चाहे वह शिक्षा हो, करियर, परिवार या समाज।
बच्चों और युवाओं के लिए भी गीता पर research और study programs किए जा रहे हैं, ताकि इसकी शिक्षाओं को आधुनिक संदर्भ में समझा जा सके।
जीवन के हर प्रश्न का उत्तर देती है गीता
अपने जीवन अनुभव साझा करते हुए स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने बताया कि पढ़ाई के दिनों से ही उनके मन में जीवन से जुड़े कई प्रश्न थे। गुरु के सानिध्य और भगवत गीता के अध्ययन से उन्हें इन प्रश्नों के उत्तर मिले।
उन्होंने कहा कि गीता में हर सवाल का जवाब और हर समस्या का समाधान मौजूद है, बस जरूरत है उसे समझने और जीवन में उतारने की।