Supreme Court Hearing: SIR successful in other states, why controversy in Bengal
SIR Electoral Roll Revision News: Supreme Court of India ने Special Intensive Revision (SIR) को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि देश के अधिकांश राज्यों में यह प्रक्रिया smooth manner में पूरी हुई है, जबकि West Bengal में इससे जुड़े विवाद और कानूनी चुनौतियाँ सामने आई हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान Chief Justice of India (CJI) Surya Kant और जस्टिस Joymalya Bagchi की बेंच ने विभिन्न याचिकाओं पर विचार किया। इन याचिकाओं में एक याचिका राज्य की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की ओर से भी दायर की गई है, जिसमें electoral rolls revision और “logical discrepancy list” में मतदाताओं के वर्गीकरण को चुनौती दी गई है।
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि उन्होंने SIR पर एक रिपोर्ट पढ़ी, जिसमें बताया गया था कि अलग-अलग राजनीतिक दलों द्वारा शासित राज्यों में भी यह प्रक्रिया बिना बड़े विवाद के पूरी हुई। उन्होंने टिप्पणी की कि “by and large SIR across India smooth रहा है, सिर्फ West Bengal में ज्यादा litigation देखने को मिला है।”
इस पर याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि “logical discrepancy” जैसी श्रेणी केवल पश्चिम बंगाल में लागू की गई है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के मुख्य सचिव का midnight transfer किया जाना एक असामान्य कदम था, जो अन्य राज्यों में देखने को नहीं मिला।
दूसरी ओर, Election Commission of India (ECI) की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि अन्य राज्यों में भी SIR के बाद voter data update और वृद्धि दर्ज की गई है। उदाहरण के तौर पर गुजरात और उत्तर प्रदेश में मतदाता संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है, जिसे जनसंख्या वृद्धि से जोड़ा गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी मांग की गई कि electoral rolls freeze करने की समयसीमा बढ़ाई जाए, क्योंकि अभी भी कई आपत्तियों (objections) पर सुनवाई जारी है और procedural fairness सुनिश्चित करना जरूरी है। इस पर अदालत ने कहा कि वह इस अनुरोध पर विचार करेगी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उठाए गए कई मुद्दे administrative nature के हैं, जिन्हें संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य प्राधिकरण संभाल सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि केवल कुछ सीमित मुद्दों में ही उसकी सीधी दखल की आवश्यकता है।
Supplementary Electoral Rolls को लेकर भी बहस हुई। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि सभी राजनीतिक दलों को सूची की soft copy उपलब्ध कराई जाए। इस पर ECI ने कहा कि वह daily basis पर supplementary lists publish करने के लिए तैयार है और इस संबंध में प्रस्ताव पहले ही हाई कोर्ट के समक्ष रखा जा चुका है।
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि SIR exercise का पैमाना बेहद बड़ा है। दो लाख से अधिक आपत्तियों पर न्यायिक अधिकारियों द्वारा निर्णय लिया जा रहा है और वे लगातार काम कर रहे हैं। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को “humongous exercise” बताते हुए सभी पक्षों से सहयोग की अपील की।
इसके साथ ही अदालत ने सुझाव दिया कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में पहले चरण में चुनाव होने हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाए ताकि समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी हो सके।
यह मामला अब अगली सुनवाई के लिए 1 अप्रैल के आसपास सूचीबद्ध किया गया है, जहाँ SIR process, electoral roll disputes और administrative reforms पर आगे चर्चा हो सकती है।