Sawan Somwar 2025: A huge crowd of Shiva devotees gathered amidst the rain, Har Har Mahadev echoed in the Shiva temples
Sawan Somwar 2025 के पहले सोमवार को उत्तराखंड के प्रमुख Shiva Temples में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से हो रही मूसलधार बारिश भी Jalabhishek के लिए उमड़े भक्तों के उत्साह को कम नहीं कर पाई। हर-हर महादेव के जयघोष के बीच मंदिरों के प्रांगण श्रद्धा और भक्ति से गूंज उठे।
कनखल: पौराणिक आस्था का केंद्र, Daksheshwar Mahadev का वचन निभा रहे शिव
हरिद्वार स्थित Kanakhal नगरी को हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। यही वह भूमि है जहां Raja Daksha ने महायज्ञ का आयोजन किया था और Sati ने अपने आत्मसम्मान के लिए प्राण त्याग दिए थे। यहीं से शिव का तांडव आरंभ हुआ और यहीं से भारत में 52 Shakti Peethas की स्थापना का अध्यात्मिक सूत्रपात हुआ।
आज भी इस पावन भूमि पर सावन के सोमवार को Lord Shiva as Daksheshwar Mahadev अवतरित होते हैं और भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।
शिव और शक्ति की युगल उपस्थिति: पांच ज्योतिर्थ और पांच शक्तिपीठ
Kanakhal Spiritual Circuit में एक तरफ हैं Shakti Temples जैसे:
Sheetla Mata Mandir
Maya Devi Temple
Chandi Devi
Mansa Devi
Sati Kund
दूसरी ओर शिव के भी पांच प्रतिष्ठित स्थान हैं:
Daksheshwar Mahadev
Bilvkeshwar Mahadev
Neeleshwar
Virbhadra Mahadev
Neelkanth Mahadev
इन सभी मंदिरों को जोड़ने वाला केंद्र आकाश और पाताल तक फैला हुआ है — एक अद्वितीय Cosmic Energy Grid जो शिव और शक्ति को जोड़ता है।
बारिश में भी नहीं रुकी श्रद्धा की धारा
Rainy Weather Updates from Uttarakhand के बावजूद देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश समेत पूरे गढ़वाल क्षेत्र में Shiv Bhakts जलाभिषेक के लिए सुबह 4 बजे से ही कतार में लगे रहे। हाथों में Ganga Jal, कंधों पर Kanwar, और होंठों पर Har Har Mahadev — यह दृश्य एक दिव्य अनुभूति जैसा था।
शिव के क्रोध की कथा: जब सती की देह उठाए तांडव करते चले शिव
मायापुरी (हरिद्वार) स्थित Sheetla Mandir में देवी सती का जन्म हुआ था। यहीं पर जब सती ने यज्ञ में अपने प्राण त्यागे, तो Veerbhadra ने उनकी पार्थिव देह को वहीं रखा। यह स्थान आज की Maya Devi Temple के रूप में जाना जाता है।