उत्तराखंड की राजधानी Dehradun में बढ़ते LPG shortage का असर अब सीधे रमजान के इफ्तार पर दिखाई देने लगा है। पवित्र महीने Ramadan के दौरान मुस्लिम परिवारों के iftar dastarkhwan पर इस बार पारंपरिक व्यंजनों की जगह साधारण और हल्के विकल्प नजर आ रहे हैं।
शहर के मुस्लिम बहुल इलाकों जैसे इनामउल्ला बिल्डिंग, मुस्लिम कॉलोनी, चकराता रोड और आजाद कॉलोनी में लोग गैस बचाने के लिए तली हुई चीजों को कम कर रहे हैं।
इफ्तार से गायब हो रही हैं तली हुई चीजें
आमतौर पर इफ्तार के समय पकौड़ियां, चिप्स और पापड़ जैसे deep-fried snacks दस्तरखान का अहम हिस्सा होते हैं। लेकिन इस बार गैस बचाने के लिए कई परिवारों ने इन चीजों को कम कर दिया है।
आजाद कॉलोनी की रिहाना बेगम और अंजुम के मुताबिक पकौड़ी तलने में ज्यादा गैस खर्च होती है, इसलिए अब इफ्तार में fresh fruits और हल्के व्यंजनों को प्राथमिकता दी जा रही है। कई परिवार बाजार से तैयार चिप्स और पापड़ लेकर काम चला रहे हैं ताकि घरेलू गैस की खपत कम हो सके।
मिठाई की दुकानों में चाय और जलेबी बननी बंद
गैस संकट का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के food business पर भी पड़ रहा है।
रायपुर चौक स्थित Ratan Sweets में गैस का स्टॉक केवल दो दिन का बचा है। दुकान में काम करने वाले सागर प्रजापति बताते हैं कि गैस की कमी के कारण फिलहाल chai, jalebi और imarti बनाना बंद करना पड़ा है और केवल समोसे व मिठाइयां ही तैयार की जा रही हैं।
सामने स्थित Krishna Sweets में भी यही स्थिति है। यहां भी गैस की कमी के कारण चाय बनना बंद हो गई है और व्यापारी अब diesel bhatti का सहारा लेने की तैयारी कर रहे हैं।
कई दुकानों का कारोबार आधा रह गया
पटेलनगर इलाके में स्थित Gulati Sweets के संचालक रंजीत सिंह गुलाटी बताते हैं कि कई दिनों से गैस की सप्लाई नहीं मिली है। मजबूरी में डीजल भट्ठी पर काम चलाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि गैस संकट के कारण jalebi और chole bhature जैसे लोकप्रिय व्यंजन बनाना बंद करना पड़ा है, जिससे कारोबार पर बड़ा असर पड़ा है।
जोगीवाला में 90% तक गिरा कारोबार
जोगीवाला स्थित Anandam Sweets के संचालक आनंद बिष्ट के अनुसार गैस की कमी से उनका कारोबार लगभग 90% तक गिर गया है।
पहले यहां रोजाना तीन सिलेंडर की खपत होती थी, लेकिन अब सिलेंडर नहीं मिलने के कारण dosa, chowmein और tikki counters बंद करने पड़े हैं। यहां तक कि गुलाब जामुन, कलाकंद और जलेबी जैसी लोकप्रिय मिठाइयां भी फिलहाल तैयार नहीं हो पा रही हैं।
कहीं इंडक्शन तो कहीं लकड़ी के चूल्हे का सहारा
घंटाघर क्षेत्र की कई प्रतिष्ठित मिठाई दुकानों में गैस की कमी के कारण induction stove का इस्तेमाल किया जा रहा है।
वहीं कैनाल रोड पर स्थित Pandit Ji Dairy and Sweet Shop में दूध पकाने और मावा बनाने के लिए अब wood-fired chulha का उपयोग किया जा रहा है।
दुकानदारों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस की सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो शहर के food outlets और sweet shops के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।