Donald Trump समर्थित बिल से भारत पर बढ़ा दबाव, 60 अमेरिकी सांसद आए साथ

US Tariff Bill 2026, Russia Oil Import और India-US Trade को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सीनेट में एक नया विधेयक पेश किया गया है, जिसमें रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। प्रस्तावित कानून को करीब 60 अमेरिकी सांसदों का समर्थन बताया जा रहा है और इसे अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का भी समर्थन प्राप्त है। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो भारत सहित कई देशों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।

क्या है ‘Sanctioning Russia Act of 2026’?

प्रस्तावित Sanctioning Russia Act of 2026 के तहत अमेरिकी प्रशासन को यह अधिकार देने की बात कही गई है कि वह रूस से ऊर्जा आयात करने वाले पांच सबसे बड़े खरीदार देशों पर अधिकतम 100% टैरिफ लगा सके। रिपोर्टों के अनुसार इस सूची में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हो सकते हैं।

इसके अलावा, उन देशों पर भी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है जिन पर रूस को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचाने में मदद करने का आरोप लगाया जाता है। हालांकि, अंतिम टैरिफ दर U.S. Trade Representative (USTR) द्वारा तय की जाएगी।

यूरोपीय सहयोगियों को दी गई राहत

प्रस्तावित बिल में कुछ यूरोपीय देशों को छूट देने का भी प्रावधान है। ऐसे सहयोगी देश जो रूस के कुल प्राकृतिक गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता लगातार कम कर रहे हैं, उन्हें राहत मिल सकती है। साथ ही, USTR हर 180 दिन में शीर्ष पांच खरीदार देशों की समीक्षा करेगा।

अमेरिका ने अपने लिए भी रखा अपवाद

विधेयक में अमेरिका के लिए भी एक विशेष छूट का प्रावधान रखा गया है। इसके तहत परमाणु रिएक्टरों में उपयोग होने वाले Low-Enriched Uranium की खरीद को प्रस्तावित टैरिफ से बाहर रखा गया है।

साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार देने का भी प्रस्ताव है कि यदि किसी देश को छूट देना राष्ट्रीय हित में हो, तो उचित कारण बताते हुए उस देश को इन प्रतिबंधों से राहत दी जा सके।

भारत पर क्या पड़ सकता है असर?

ऊर्जा विश्लेषण से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। इसी वजह से भारत दुनिया में रूस के तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार माना जा रहा है। यदि नया बिल कानून का रूप लेता है और भारत शीर्ष पांच खरीदार देशों में बना रहता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों और आयात-निर्यात पर इसका असर पड़ सकता है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह अभी एक प्रस्तावित विधेयक है, कानून नहीं। इसे प्रभावी होने से पहले अमेरिकी संसद की विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा और अंतिम स्वरूप में बदलाव भी संभव है।

पुराने प्रस्ताव से कैसे अलग है नया बिल?

यह नया प्रस्ताव पिछले वर्ष लाए गए मसौदे की तुलना में अपेक्षाकृत नरम माना जा रहा है। पहले प्रस्ताव में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने की बात थी, जबकि नए संस्करण में अधिकतम सीमा 100% रखी गई है। इसके अलावा, दायरा भी सभी देशों के बजाय केवल शीर्ष पांच खरीदार देशों तक सीमित किया गया है।