Pollution Alert: दिल्ली को टक्कर दे रहा देहरादून, AQI पहुंचा 460 पार – जानें बाकी शहरों का हाल

राजधानी दिल्ली की तरह अब देहरादून की हवा भी खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। दीवाली की रात Air Quality Index (AQI) ने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 460 का आंकड़ा पार कर दिया। यह उत्तराखंड के इतिहास में अब तक का सबसे खराब वायु गुणवत्ता स्तर है। विशेषज्ञों का कहना है कि आतिशबाजी और ठहरी हुई हवा ने मिलकर इस प्रदूषण को चरम पर पहुंचा दिया।

20 अक्टूबर की रात करीब 12:30 बजे Doon University क्षेत्र में एक्यूआई 460 दर्ज किया गया। इससे पहले राज्य में किसी भी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता इतनी खराब नहीं हुई थी। पर्यावरण विशेषज्ञों ने इसे fireworks pollution का सीधा परिणाम बताया है।

Delhi vs Dehradun Pollution: दोनों राजधानियों में दमघोंटू हवा

दिल्ली में दीवाली के अगले दिन औसतन AQI 351 दर्ज किया गया, जबकि कई इलाकों में यह 500 से ऊपर चला गया। देहरादून ने इस बार प्रदूषण के मामले में दिल्ली को टक्कर दे दी।

दीवाली की रात जैसे ही आठ बजे के बाद आतिशबाजी शुरू हुई, वैसे ही pollution level तेजी से बढ़ने लगा। रात 10 बजे के बाद शहर की हवा में PM 2.5 और PM 10 particles की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच गई।

Air Monitoring Data: कहां कितना रहा AQI

देहरादून में एक्यूआई की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए Ghantaghar और Nehru Colony में लगाए गए air quality monitoring systems ने भी इस स्थिति की पुष्टि की।

Doon University Area: रात 12:30 बजे AQI 460 पार

Nehru Colony: औसत AQI 230

Ghantaghar: औसत AQI 254

Doon University (Avg): 128

Overall Average AQI (Dehradun): 204 (पिछले साल 288 था)

हालांकि देर रात 2 बजे के बाद हवा की गति बढ़ने से प्रदूषण का स्तर धीरे-धीरे कम हुआ और AQI 200 से नीचे आ गया।

अन्य शहरों की स्थिति: नैनीताल और टिहरी में राहत

Uttarakhand Pollution Control Board (PCB) के अनुसार, इस बार प्रदूषण जागरूकता अभियानों के चलते कई शहरों में AQI पिछले साल से बेहतर रहा।

Tehri: AQI 66 (पिछले साल 93)

Nainital: AQI 111 (पिछले साल 119)

Rishikesh: AQI 135

Haldwani: AQI 198 (पिछले साल 192)

इस बार टिहरी और नैनीताल जैसे हिल स्टेशन में हवा अपेक्षाकृत साफ रही, जबकि Rishikesh और Haldwani में प्रदूषण का स्तर हल्का बढ़ा।

Experts का कहना – आतिशबाजी और ठहरी हवा बनी मुख्य वजह

Doon University के Environmental Science Department के प्रमुख Dr. Vijay Sridhar ने बताया कि रात के समय तापमान गिरने और हवा की गति धीमी होने से firecrackers का smoke ऊपर नहीं उठ सका, जिससे प्रदूषण बढ़ गया।

PCB Secretary Dr. Parag Madhukar Dhakate ने कहा कि इस बार प्रदूषण रोकने के लिए कई preventive measures और awareness campaigns चलाए गए, जिससे अधिकांश शहरों में स्थिति नियंत्रण में रही।

देहरादून की हवा में बढ़ा खतरा, अब जरूरी सख्त कदम

दिवाली के बाद देहरादून की हवा में toxic particles की मात्रा चिंताजनक स्तर पर है। भले ही औसतन एक्यूआई पिछले साल से कम रहा हो, लेकिन 460 तक पहुंचना पर्यावरणीय चेतावनी है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि सरकार को अब green crackers, public fireworks zones, और traffic emission control जैसे उपायों को और सख्ती से लागू करना चाहिए, ताकि आने वाले महीनों में हवा की गुणवत्ता सुधर सके।