पुलिस ने खड़े किए हाथ, मां ने CCTV खंगालकर खोज निकाला बेटे का हत्यारा

Dehradun News से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस जांच व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देहरादून में 18 वर्षीय युवक की hit and run case में मौत के बाद पुलिस ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि उनके पास “जादू की छड़ी” नहीं है, जिससे आरोपी तक जल्दी पहुंचा जा सके। लेकिन जिस मां ने अपने बेटे को खोया, उसने हार मानने के बजाय खुद ही पूरे केस की तह तक पहुंचने का फैसला किया — और आखिरकार आरोपी तक भी पहुंच गई।

यह मामला अब एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि मां की ओर से जुटाए गए सबूतों के बाद एसएसपी ने केस की re-investigation के आदेश दे दिए हैं।

बेटे की मौत के बाद मां ने खुद संभाली जांच

देहरादून के सहस्रधारा रोड स्थित विश्वनाथ एन्क्लेव निवासी ललिता चौधरी, जो पेशे से beautician हैं, पिछले डेढ़ साल से अपने बेटे को इंसाफ दिलाने की लड़ाई लड़ रही हैं। उनका 18 वर्षीय बेटा क्षितिज चौधरी 16 फरवरी 2024 को प्रेमनगर क्षेत्र में एक सुविधा स्टोर के सामने पैदल जा रहा था, तभी एक अज्ञात डंपर ने उसे कुचल दिया।

हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो गया। गंभीर रूप से घायल क्षितिज को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अगले दिन उसने दम तोड़ दिया।

पुलिस ने जल्दबाजी में बंद कर दिया मामला

बेटे की मौत के बाद परिवार को उम्मीद थी कि पुलिस आरोपी तक पहुंचेगी और न्याय दिलाएगी। लेकिन परिवार के मुताबिक, जांच की रफ्तार बेहद धीमी रही और मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया।

21 फरवरी को जब ललिता चौधरी ने केस के विवेचक से संपर्क किया, तो उन्हें कथित तौर पर जवाब मिला कि बिना वाहन नंबर के आरोपी वाहन को ढूंढना आसान नहीं है और पुलिस के पास कोई “magic wand” नहीं है कि तुरंत कार्रवाई कर दी जाए।

इसके बाद पुलिस ने बिना आरोपी चालक को खोजे ही इस केस में FR (Final Report) लगा दी।

पुलिस ने छोड़ा, मां ने नहीं छोड़ी उम्मीद

जहां सिस्टम ने इस मामले को लगभग बंद मान लिया, वहीं मां ने अपने बेटे के लिए न्याय की लड़ाई खुद लड़ने का फैसला किया। बेटे की मौत और पुलिस के कथित अमानवीय रवैये ने ललिता को भीतर तक तोड़ दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

उन्होंने महीनों तक देहरादून की सड़कों की खाक छानी, अलग-अलग जगहों के CCTV footage जुटाए, वीडियो खंगाले और हर उस सुराग को जोड़ा, जो उनके बेटे के कातिल तक पहुंचा सकता था।

CCTV फुटेज और संदिग्ध वाहनों के सहारे बढ़ीं आगे

ललिता चौधरी ने अपनी निजी कोशिशों से कई CCTV clips इकट्ठा किए और हादसे के वक्त गुजरने वाले संदिग्ध वाहनों की पहचान करने की कोशिश शुरू की। उन्होंने करीब 10 संदिग्ध वाहनों के नंबर भी पुलिस को सौंपे, लेकिन परिवार का आरोप है कि उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

इसके बावजूद उन्होंने अपने स्तर पर जांच जारी रखी और एक-एक कड़ी जोड़ती रहीं।

डेढ़ साल बाद मां ने खुद ढूंढ निकाला आरोपी

करीब डेढ़ साल के संघर्ष के बाद आखिरकार ललिता चौधरी की मेहनत रंग लाई। उन्होंने न सिर्फ उस अज्ञात डंपर की पहचान कर ली, बल्कि उसके कथित मालिक अंकित चौहान तक भी पहुंच गईं।

यह पूरा खुलासा तब सामने आया, जब ललिता ने शनिवार को एसएसपी कार्यालय पहुंचकर जुटाए गए सबूतों और दस्तावेजों के साथ एक प्रार्थना पत्र सौंपा।

उनकी ओर से पेश किए गए तथ्यों और साक्ष्यों को देखते हुए एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने मामले में दोबारा जांच के आदेश दे दिए।

एसएसपी ने दिए दोबारा जांच के आदेश

मामला सामने आने के बाद Senior Superintendent of Police (SSP) ने कहा है कि यदि आरोपी की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ strict legal action लिया जाएगा।

मां की ओर से सामने लाए गए सबूतों ने अब इस केस को नया मोड़ दे दिया है और परिवार को एक बार फिर न्याय की उम्मीद जगी है।

FIR दर्ज कराने के लिए भी करना पड़ा संघर्ष

इस मामले का सबसे दर्दनाक पहलू सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि उसके बाद का पुलिस रवैया भी बताया जा रहा है। परिजनों के अनुसार, बेटे की मौत के बाद शुरू में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने में भी टालमटोल की।

बताया गया कि जब तक मां रोती-बिलखती हालत में थाने नहीं पहुंचीं, तब तक मामला दर्ज नहीं किया गया। मजबूरी में फूल चुगने के दिन ललिता चौधरी खुद थाने पहुंचीं, जिसके बाद कहीं जाकर FIR दर्ज की गई।

यह सिर्फ एक मां की लड़ाई नहीं, सिस्टम पर सवाल भी है

यह मामला केवल एक road accident case या hit and run investigation तक सीमित नहीं है। यह उस सवाल को भी सामने लाता है कि जब जांच एजेंसियां शुरुआती स्तर पर ही हाथ खड़े कर दें, तो आम नागरिक न्याय के लिए कहां जाए?

ललिता चौधरी की लड़ाई इस बात का उदाहरण है कि एक मां अपने बेटे के लिए किस हद तक जा सकती है। लेकिन यह भी उतना ही बड़ा सवाल है कि जो काम पुलिस को करना चाहिए था, वह आखिर

एक शोकाकुल मां को क्यों करना पड़ा?

देहरादून केस ने खड़े किए कई गंभीर सवाल

यह Dehradun hit and run case अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि police accountability, investigation failure और justice system की संवेदनशीलता पर भी बड़ी बहस खड़ी कर रहा है।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि दोबारा जांच में क्या सामने आता है और क्या क्षितिज चौधरी के परिवार को आखिरकार न्याय मिल पाएगा।