पारदर्शिता की दिशा में बड़ा फैसला, लोकायुक्त के लिए नाम तलाशेगी हाई-लेवल समिति

उत्तराखंड में लंबे समय से लंबित Lokayukta Formation Process को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने लोकायुक्त के अध्यक्ष और सदस्यों के चयन की प्रक्रिया को गति देते हुए पांच सदस्यीय Search Committee (खोजबीन समिति) का गठन कर दिया है। यह समिति योग्य उम्मीदवारों की पहचान कर उनके नामों का पैनल तैयार करेगी, जिसे आगे चयन समिति (Selection Committee) के समक्ष रखा जाएगा।

सरकार के इस फैसले को राज्य में Good Governance, Transparency और Accountability को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।

लोकायुक्त गठन की प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार

उत्तराखंड में लोकायुक्त संस्था के गठन को लेकर लंबे समय से मांग उठती रही है। अब सरकार ने इस दिशा में औपचारिक कदम बढ़ाते हुए अध्यक्ष और सदस्यों के चयन के लिए सर्च कमेटी का गठन कर दिया है।

कार्मिक एवं सतर्कता विभाग के सचिव शैलेश बगौली के अनुसार, Uttarakhand Lokayukta Act 2014 के प्रावधानों के तहत यह समिति गठित की गई है। यह निर्णय 4 जून 2026 को आयोजित चयन समिति की बैठक में हुई चर्चा और अधिनियम की धारा 4(3) के तहत मिली संस्तुति के आधार पर लिया गया।

2023 में हुआ था Selection Committee का गठन

लोकायुक्त के चयन के लिए गठित चयन समिति का गठन वर्ष 2023 में उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद किया गया था।

चयन समिति में शामिल प्रमुख सदस्य हैं:

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (अध्यक्ष)
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण
नैनीताल हाईकोर्ट के प्रतिनिधि मनोज कुमार
विधि विशेषज्ञ (Legal Expert)

यह समिति लोकायुक्त के अध्यक्ष और सदस्यों की अंतिम नियुक्ति से संबंधित निर्णय लेगी।

कौन-कौन हैं Search Committee में शामिल?

गठित खोजबीन समिति में न्यायिक, प्रशासनिक और शैक्षणिक क्षेत्र के अनुभवी व्यक्तियों को शामिल किया गया है।

समिति की अध्यक्षता करेंगे:

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) आलोक वर्मा, पूर्व न्यायाधीश, उत्तराखंड हाईकोर्ट

समिति के अन्य सदस्य:

इंदु कुमार पांडे (पूर्व मुख्य सचिव)
सुभाष कुमार (पूर्व मुख्य सचिव)
राधा रतूड़ी (पूर्व मुख्य सचिव)
प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल (कुलपति, दून विश्वविद्यालय)

इन सभी सदस्यों का शासन, प्रशासन, न्यायिक प्रणाली और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रहा है।

Search Committee की क्या होगी जिम्मेदारी?

Uttarakhand Lokayukta Act 2014 की धारा 4(4) के अनुसार, खोजबीन समिति का मुख्य कार्य लोकायुक्त के अध्यक्ष और सदस्य पदों के लिए योग्य एवं उपयुक्त व्यक्तियों की पहचान करना होगा।

समिति:

पात्र उम्मीदवारों के नामों पर विचार करेगी
उनकी योग्यता और अनुभव का मूल्यांकन करेगी
चयन समिति के लिए नामों का पैनल तैयार करेगी
अंतिम चयन के लिए अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी

विशेषज्ञों का मानना है कि लोकायुक्त संस्था की गुणवत्ता और प्रभावशीलता काफी हद तक इसी समिति की सिफारिशों पर निर्भर करेगी।

क्यों महत्वपूर्ण है लोकायुक्त संस्था?

Lokayukta को एक स्वतंत्र भ्रष्टाचार निरोधक (Anti-Corruption) संस्था माना जाता है। इसका उद्देश्य जनप्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों और लोकसेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतों की जांच करना होता है।

लोकायुक्त जैसी संस्था:

प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करती है
भ्रष्टाचार पर निगरानी रखती है
जनता के विश्वास को मजबूत करती है
शासन में पारदर्शिता बढ़ाने का काम करती है
पारदर्शी चयन प्रक्रिया पर रहेगा फोकस

सरकार द्वारा समिति में न्यायिक, प्रशासनिक और शैक्षणिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित हस्तियों को शामिल किए जाने को चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चयन प्रक्रिया तय समयसीमा में पूरी होती है, तो उत्तराखंड में लंबे समय से प्रतीक्षित लोकायुक्त व्यवस्था को नई सक्रियता मिल सकती है।

सुशासन को मिलेगी मजबूती

लोकायुक्त के अध्यक्ष और सदस्यों के चयन की प्रक्रिया शुरू होना राज्य में Transparent Governance, Anti-Corruption Mechanism और Administrative Accountability को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अब Search Committee योग्य नामों की पहचान और मूल्यांकन का कार्य शुरू करेगी। इसके बाद चयन समिति अंतिम निर्णय लेकर लोकायुक्त के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति का रास्ता साफ करेगी।

राज्य में लंबे समय से लंबित इस प्रक्रिया के आगे बढ़ने से प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार विरोधी तंत्र को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।