LeT Module Exposed: Who is the mastermind of the network active in Delhi-Kolkata?
Delhi News से जुड़े एक संवेदनशील मामले में जांच एजेंसियों को कई अहम सुराग मिले हैं। दिल्ली और कोलकाता में राष्ट्र-विरोधी पोस्टर लगाए जाने के मामले में गिरफ्तार संदिग्धों से पूछताछ के बाद सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कथित तौर पर शब्बीर अहमद लोन की केंद्रीय भूमिका हो सकती है। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क केवल पोस्टरबाजी तक सीमित नहीं था, बल्कि Delhi Terror Plot और Kashmir terror conspiracy जैसे बड़े इरादों से भी जुड़ा हो सकता है।
एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए मिल रहे थे निर्देश
जांच एजेंसियों के मुताबिक, शब्बीर लोन कथित तौर पर encrypted communication apps के जरिए Lashkar-e-Taiba (LeT) से जुड़े कमांडरों के संपर्क में था। पूछताछ में सामने आया कि उसे सीमापार बैठे हैंडलरों से निर्देश मिलते थे और वह उन्हीं के आधार पर भारत के अलग-अलग हिस्सों में नेटवर्क तैयार करने में लगा हुआ था।
अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की secure digital communication का इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने और मॉड्यूल को सक्रिय बनाए रखने के लिए किया जा रहा था।
दो दशक पुराना बताया जा रहा है आतंकी संपर्क
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, शब्बीर लोन का कथित आतंकी संपर्क कोई नया नहीं, बल्कि काफी पुराना है। बताया जा रहा है कि वह करीब दो दशक पहले ही LeT-linked elements के संपर्क में आ गया था। शुरुआती दौर में उस पर आतंकियों को रसद, भोजन और स्थानीय मदद उपलब्ध कराने के आरोप लगे थे, जिसके बाद वह धीरे-धीरे इस नेटवर्क का हिस्सा बनता चला गया।
यही पृष्ठभूमि अब एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण जांच बिंदु बनी हुई है, क्योंकि इससे यह समझने की कोशिश की जा रही है कि उसका नेटवर्क समय के साथ कितना फैला।
पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी
शब्बीर लोन का नाम पहले भी सुरक्षा एजेंसियों की जांच में सामने आ चुका है। रिकॉर्ड के अनुसार, उसे अतीत में गैरकानूनी गतिविधियों और विस्फोटक/हथियार संबंधी मामलों में गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि जेल से बाहर आने के बाद भी उसके संपर्क खत्म नहीं हुए, बल्कि कथित तौर पर और अधिक मजबूत होते गए।
यही वजह है कि मौजूदा मामले को सिर्फ एक poster case नहीं, बल्कि एक बड़े terror ecosystem से जोड़कर देखा जा रहा है।
Bangladesh Link ने बढ़ाई चिंता
जांच में सामने आया एक और अहम पहलू Bangladesh link है। एजेंसियों के अनुसार, 2025 के दौरान इस मॉड्यूल ने अपनी रणनीति बदली और सीमापार ठिकानों के जरिए गतिविधियां संचालित करने की कोशिश की। आरोप है कि शब्बीर लोन अवैध रास्तों से बांग्लादेश पहुंचा, जहां उसने अपने लिए सुरक्षित आधार तैयार किया।
जांचकर्ताओं का मानना है कि इस तरह के cross-border shelter का इस्तेमाल पहचान छिपाने, स्थानीय नेटवर्क बनाने और नए लोगों की भर्ती के लिए किया गया हो सकता है। इसी एंगल पर अब सुरक्षा एजेंसियां और गहराई से काम कर रही हैं।
युवाओं की भर्ती और नेटवर्क विस्तार पर था फोकस
पूछताछ में यह भी संकेत मिले हैं कि मॉड्यूल का एक बड़ा मकसद radicalisation और youth recruitment था। जांच एजेंसियों के अनुसार, शब्बीर को कथित तौर पर कश्मीर समेत अन्य राज्यों में युवाओं को प्रभावित कर उन्हें नेटवर्क से जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई थी।
यह पैटर्न सुरक्षा एजेंसियों के लिए इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि इस तरह के मॉड्यूल अक्सर सीधे हमले से पहले local support base तैयार करने की कोशिश करते हैं।
पोस्टरबाजी सिर्फ ‘टेस्ट मिशन’ थी?
जांच में एक बेहद चौंकाने वाला एंगल यह भी सामने आया कि दिल्ली और कोलकाता में लगाए गए anti-national posters को केवल प्रचार सामग्री नहीं, बल्कि एक तरह के loyalty test के रूप में देखा जा रहा है। एजेंसियों के मुताबिक, इन गतिविधियों के जरिए नए जुड़े लोगों की निष्ठा, जोखिम उठाने की क्षमता और निर्देशों के पालन की जांच की जा रही थी।
अगर यह एंगल सही साबित होता है, तो यह मामला सिर्फ पोस्टरबाजी नहीं, बल्कि terror module activation pattern का हिस्सा माना जा सकता है।
भीड़भाड़ वाले इलाकों की कथित रेकी भी जांच के दायरे में
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इस मॉड्यूल से जुड़े कुछ लोगों ने कथित तौर पर Delhi और Kolkata के भीड़भाड़ वाले इलाकों, व्यापारिक केंद्रों और संवेदनशील स्थानों की reconnaissance (reki) भी की थी। यह जानकारी सामने आने के बाद जांच और अधिक गंभीर हो गई है।
हालांकि एजेंसियां अभी आधिकारिक तौर पर कई बिंदुओं की पुष्टि से बच रही हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि मामले को internal security threat के रूप में देखा जा रहा है।
Special Cell की कार्रवाई में कई संदिग्ध गिरफ्तार
एक गुप्त ऑपरेशन के दौरान Special Cell ने इस मॉड्यूल से जुड़े कई संदिग्धों को हिरासत में लिया। इनमें कथित तौर पर कुछ विदेशी नागरिकों के साथ एक भारतीय नागरिक भी शामिल बताया जा रहा है। इन गिरफ्तारियों के बाद एजेंसियों को नेटवर्क की संरचना, संपर्कों और फंडिंग चैनलों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
फंडिंग, डिजिटल ट्रेल और स्लीपर सेल की जांच जारी
अब जांच का फोकस केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क को funding कहां से मिल रही थी, कौन-कौन से digital platforms इस्तेमाल किए जा रहे थे, और क्या देश के अन्य शहरों में भी इसके sleeper cells सक्रिय हो सकते हैं।
Financial transactions, device recovery, communication logs और movement patterns जैसे कई पहलुओं की जांच की जा रही है। यही जांच आने वाले दिनों में इस केस की सबसे अहम दिशा तय कर सकती है।
फिलहाल यह मामला भारत की internal security से जुड़ा एक गंभीर जांच विषय बन चुका है। शब्बीर लोन से जुड़े खुलासों ने यह संकेत दिया है कि आधुनिक आतंकी नेटवर्क अब digital communication, cross-border movement, local recruitment और covert testing जैसे कई स्तरों पर काम कर रहे हैं।
जांच एजेंसियों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि यह नेटवर्क कितना व्यापक था और क्या इससे जुड़े और भी सक्रिय मॉड्यूल देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हैं।