Kishtwar Encounter: Army, JKP और CRPF की Joint Action में 7 आतंकियों का सफाया

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में सुरक्षाबलों ने एक बड़े Counter-Terror Operation को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए Jaish-e-Mohammad (JeM) के 7 सदस्यीय आतंकी मॉड्यूल का पूरी तरह सफाया कर दिया। इस मॉड्यूल को ‘Israel Group’ के नाम से जाना जाता था। रविवार को हुए अंतिम encounter में स्वयंभू कमांडर सैफुल्ला समेत तीन बचे आतंकियों के मारे जाने के साथ करीब 18 महीने से चल रहा ऑपरेशन खत्म हो गया।

अप्रैल 2024 में घुसपैठ, 17 बार आमना-सामना

जम्मू जोन के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) भीम सेन टूटी के मुताबिक, इस आतंकी मॉड्यूल ने अप्रैल 2024 में भारतीय सीमा में घुसपैठ की थी। इसके बाद से सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच 17 अलग-अलग मौकों पर मुठभेड़ (multiple encounters) हुई।

यह मॉड्यूल अप्रैल-मई 2024 से ही security forces radar पर था। अप्रैल 2025 में इसके तीन आतंकी मारे गए थे। 14 जनवरी 2026 को सेना, Jammu & Kashmir Police (JKP) और CRPF ने मिलकर ‘Operation Trashi-I’ लॉन्च किया। 4 फरवरी को ‘आदिल’ नामक आतंकी मारा गया और 21-22 फरवरी की दरम्यानी रात पहाड़ी इलाके में घेराबंदी के बाद 22 फरवरी को सैफुल्ला समेत अंतिम तीन आतंकियों को ढेर कर दिया गया।

दुर्गम इलाका, खराब मौसम और Joint Forces की रणनीति

यह ऑपरेशन आसान नहीं था। पहाड़ी क्षेत्र, भारी बारिश, बर्फबारी और भूस्खलन जैसी चुनौतियों के बीच सेना की Counter-Insurgency Force (Delta), JKP और CRPF ने बेहतरीन तालमेल दिखाया।

जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) मेजर जनरल ए.पी.एस. बल ने कहा कि राष्ट्र-विरोधी तत्व जहां भी होंगे, उन्हें ढूंढकर खत्म किया जाएगा। ऑपरेशन के दौरान जवानों को थकान से बचाने के लिए troop rotation plan लागू किया गया और जरूरत पड़ने पर रिजर्व टुकड़ियों को एयरलिफ्ट भी किया गया।

बहादुर Army Dog ‘Tyson’ की अहम भूमिका

इस पूरे counter-insurgency mission में सेना के प्रशिक्षित डॉग ‘Tyson’ (German Shepherd) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक पहाड़ी झोपड़ी (ढोक) में आतंकियों की मौजूदगी की पुष्टि करने के लिए उसे अंदर भेजा गया। इसी दौरान आतंकियों की गोलीबारी में टायसन घायल हो गया।

उसे तुरंत airlift कर इलाज के लिए भेजा गया। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। सेना ने उसके साहस और योगदान की विशेष सराहना की है।

हथियार बरामद, सुरक्षाबलों को नहीं हुआ नुकसान

सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों के पास से तीन AK-47 rifles और अन्य हथियार बरामद किए गए। दुर्गम इलाके और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को कोई जनहानि नहीं हुई।

मददगारों पर होगी सख्त कार्रवाई

IGP टूटी ने साफ कहा कि जो लोग आतंकियों को पनाह या लॉजिस्टिक सपोर्ट दे रहे थे, उनके खिलाफ भी strict legal action लिया जाएगा। जांच एजेंसियां अब उनके नेटवर्क और स्थानीय सहयोगियों की पहचान में जुटी हैं।

Kishtwar में अब सिर्फ 3 स्थानीय आतंकी सक्रिय

अधिकारियों के अनुसार, किश्तवाड़ जिले में अब केवल तीन स्थानीय आतंकी बचे हैं, जो पिछले दो दशकों से सक्रिय हैं। हाल के वर्षों में भर्ती हुए नए आतंकियों का पूरी तरह सफाया किया जा चुका है।

जनता का सहयोग बना बड़ी ताकत

सुरक्षा एजेंसियों ने स्थानीय कश्मीरी अवाम के सहयोग की सराहना की। अधिकारियों के मुताबिक, कई अहम intelligence inputs आम लोगों से मिले, जिसने इस ऑपरेशन को सफल बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई।

अधिकारियों का कहना है कि जनता का समर्थन भारत के साथ है और आतंकवाद के खिलाफ यह लड़ाई जारी रहेगी।