Reference Image-High Court strict on hotel construction in Eco-Sensitive Zone, rejects reports of DM and Irrigation Department
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भागीरथी इको सेंसिटिव जोन (Bhagirathi Eco Sensitive Zone) में NGT guidelines के विपरीत अवैध होटल और रिसॉर्ट्स के निर्माण की अनुमति देने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है।
मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अब तक दायर रिपोर्ट से कोर्ट संतुष्ट नहीं है। अदालत ने जिलाधिकारी उत्तरकाशी और सिंचाई विभाग से कहा है कि वे पूर्व आदेशों के अनुपालन की विस्तृत रिपोर्ट 24 नवंबर से पहले कोर्ट में प्रस्तुत करें।
Court ने कहा – Drone Survey Report पेश नहीं की गई
पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि Eco Sensitive Zone में Commercial Constructions की स्थिति का Drone Videography Survey कराकर रिपोर्ट दी जाए।
हालांकि अब तक यह रिपोर्ट पेश नहीं की गई है।
साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा था कि Flood Zone Areas में हुए अवैध निर्माणों की videography कर उनकी जानकारी दी जाए। लेकिन विभागों ने इस पर कोई प्रगति नहीं दिखाई। इस पर कोर्ट ने उन्हें अतिरिक्त समय देते हुए 24 नवंबर से पहले यह रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता का आरोप – सरकार नहीं मान रही NGT के नियम
Himalayan Nagrik Drishti Manch द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि Gangotri से Uttarkashi तक नदी किनारे large-scale illegal construction चल रहा है, जो NGT के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि बिना वैज्ञानिक सर्वे के camps, hotels और resorts की अनुमति दी जा रही है।
इसके चलते हर साल क्षेत्र में flood disaster और landslide incidents बढ़ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि इन निर्माणों पर complete ban लगाया जाए और illegal structures को हटाया जाए।
सरकार का पक्ष – सभी अनुमति Survey के बाद ही दी गई
वहीं राज्य सरकार की ओर से पेश अधिकारियों ने कहा कि अब तक जिन निर्माणों की अनुमति दी गई है, उनका proper survey किया गया था।
लेकिन कोर्ट इस जवाब से भी संतुष्ट नहीं हुई और सरकार से कहा कि वह complete survey report प्रस्तुत करे, जिससे यह साबित हो सके कि कोई भी अनुमति नियमों के विपरीत नहीं दी गई।
High Court का सख्त संदेश
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों का regular inspection करें ताकि किसी भी आपदा के समय जनधन की हानि को कम किया जा सके।
साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार से Flood Zone Act के implementation status की रिपोर्ट भी मांगी है।
उत्तराखंड हाईकोर्ट का यह रुख साफ संकेत देता है कि Eco Sensitive Zones में अवैध निर्माण को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गौमुख से उत्तरकाशी तक का यह इलाका न केवल environmentally fragile है बल्कि यहां का हर निर्माण हिमालय की पारिस्थितिकी पर सीधा असर डालता है।
अब देखना यह होगा कि Uttarkashi District Administration और State Government कोर्ट के आदेशों का अनुपालन कैसे करती है।