Fuel Price Difference बना बड़ी वजह, बिहार और नेपाल बॉर्डर पर बढ़ी पेट्रोल-डीजल की खपत

Gorakhpur समेत पूर्वी Uttar Pradesh के कई जिलों में इन दिनों Petrol-Diesel Shortage जैसी स्थिति देखने को मिल रही है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं और कई जगहों पर Fuel Stock जल्दी खत्म हो जा रहा है। इस बढ़ती मांग के पीछे नेपाल और बिहार बॉर्डर से जुड़ा बड़ा कारण सामने आ रहा है।

गोरखपुर में डीएम दीपक मीणा की अध्यक्षता में हुई बैठक में तीन बड़ी Oil Companies के अधिकारियों ने दावा किया कि पिछले साल की तुलना में इस बार 33 प्रतिशत अधिक Fuel Supply दी गई है। इसके बावजूद हालात सामान्य नहीं दिख रहे। स्थानीय Petrol Pump Operators का कहना है कि नेपाल और बिहार में पेट्रोल-डीजल के अधिक दाम होने की वजह से बड़ी संख्या में वाहन यूपी के बॉर्डर जिलों में टंकी फुल करा रहे हैं।

नेपाल और बिहार में ज्यादा महंगा है Fuel

जानकारी के मुताबिक नेपाल में पेट्रोल और डीजल की कीमत भारत के मुकाबले काफी ज्यादा है। पेट्रोल की कीमत में करीब 36 रुपये प्रति लीटर और डीजल में लगभग 40 रुपये प्रति लीटर का अंतर बताया जा रहा है। वहीं बिहार में शराब सेस की वजह से यूपी की तुलना में Fuel Prices करीब 10 रुपये ज्यादा हैं।

इसी कारण नेपाल और बिहार जाने वाले वाहन चालक बॉर्डर पार करने से पहले यूपी के जिलों में टैंक फुल करवा रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर Kushinagar, Deoria और Maharajganj जैसे जिलों में देखने को मिल रहा है।

Border Routes पर बढ़ा Fuel Consumption

सोनौली और ठूठीबारी बॉर्डर से हर दिन सैकड़ों मालवाहक वाहन, Tourist Buses और छोटी गाड़ियां नेपाल में प्रवेश करती हैं। वहीं कुशीनगर के सलेमगढ़ बॉर्डर से हजारों वाहन बिहार की ओर जाते हैं। ऐसे में Border Districts में Fuel Consumption तेजी से बढ़ गया है।

आंकड़ों के अनुसार फरवरी के मुकाबले मार्च, अप्रैल और मई में पेट्रोल-डीजल की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले तीन महीनों में कई पेट्रोल पंपों पर Fuel Demand में 10 से 20 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है।

प्रशासन ने बनाई Monitoring Team

स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। जिला पूर्ति अधिकारी रामेंद्र प्रताप सिंह ने पेट्रोल पंपों की जांच के लिए 20 सदस्यीय टीम गठित की है। यह टीम विभिन्न क्षेत्रों में जाकर Dry Pump की स्थिति की निगरानी कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि जहां भी पेट्रोल पंप पर Fuel खत्म होने की सूचना मिलती है, वहां तुरंत संबंधित Oil Company को सप्लाई भेजने के निर्देश दिए जाते हैं। दावा किया गया है कि सूचना मिलने के तीन से चार घंटे के भीतर Fuel Supply पहुंचाई जा रही है।

Black Marketing की भी आशंका

बॉर्डर जिलों में Fuel Black Marketing की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। हाल ही में कुशीनगर में पुलिस ने एक संदिग्ध Mobile Tanker पकड़ा, जिसमें करीब 3000 लीटर अवैध ईंधन भरा हुआ था। इसके बाद प्रशासन और Oil Companies की निगरानी और सख्त कर दी गई है।

कुछ पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि गैलन में डीजल खरीदने वाले कई लोग पूछताछ करने पर विवाद करने लगते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।

Oil Companies के आंकड़ों पर उठे सवाल

Petrol Pump Dealers Association से जुड़े लोगों का कहना है कि Oil Companies को Pump-wise Supply Data सार्वजनिक करना चाहिए। उनका दावा है कि नई डीलरशिप और बढ़ते पंपों के हिसाब से सप्लाई का पूरा आंकड़ा स्पष्ट नहीं किया जा रहा, जिससे वास्तविक स्थिति समझना मुश्किल हो रहा है।